क्या इस मुद्दे से LG और “आप” सरकार के बीच हो सकता है एक नए झगड़े का आगाज़ ?

By Vishal Joshi

नई दिल्ली: गुरुवार को दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्र सरकार को रिपोर्ट करने वाले लेफ्टिनेंट गवर्नर को और अधिक शक्ति देने के लिए दिल्ली सरकार के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को केंद्र द्वारा दी मंजूरी के खिलाफ बयान दिया।

एक डिजिटल प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, सिसोदिया ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को निर्वाचित मुख्यमंत्री और दिल्ली मंत्रिमंडल से “शक्तियों को छीनने” के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी और लेफ्टिनेंट गवर्नर के अधिकार को मजबूत किया। उन्होंने कहा कि अब संशोधन के लिए संसद के बजट सत्र में एक विधेयक पेश किया जाएगा।

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Delhi Deputy CM Manish Sisodia

यह कदम लेफ्टिनेंट गवर्नर और दिल्ली सरकार के बीच एक नए झगड़े का आगाज़ है।

“केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एल-जी [लेफ्टिनेंट गवर्नर] को और अधिक शक्ति देने के लिए चुपके से संशोधनों को मंजूरी दे दी है ताकि वह अब केंद्र शासित प्रदेश में चुनी हुई सरकार द्वारा शुरू किए गए किसी भी प्रोजेक्ट या काम को रोक सके। केंद्र के प्रस्ताव के अनुसार, अंतिम निर्णय लेने की शक्ति चुनी हुई सरकार के पास नहीं बल्की एल-जी के पास होगी।”

सिसोदिया आगाह करते हैं कि अगर यह कानून पारित हो जाता है, तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा सभी सब्सिडी दिल्ली के लोगों से छीन ली जाएगी। उन्होंने कहा, “यह कुछ और नहीं बल्कि भाजपा शासित केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली पर सीधे शासन करने के लिए बनाया जा रहा एक बैक डोर चैनल है। अगर ऐसा होता है तो आप [आम आदमी पार्टी] सरकार द्वारा दी गई सभी मुफ्त सेवाएं और सब्सिडी छीन ली जाएंगी। भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार हमारी मुफ्त बिजली, पानी और महिलाओं के लिए बस की सवारी को रद्द कर देगी। यह दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज को भी रद्द कर देगी, जिस इलाज का हर दिल्लीवासी हकदार है”।

Delhi LG & Delhi Deputy CM Manish Sisodia
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सिसोदिया ने कहा कि एल-जी को इस तरह की शक्तियां देने का सीधा मतलब यह है कि दिल्ली पर भाजपा शासित केंद्र सरकार का शासन होगा।

उन्होंने कहा, “एक निर्वाचित सरकार की शक्तियों को कम करने की केंद्र की कोशिश सिर्फ लोकतंत्र के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह हमारे संविधान के खिलाफ भी है। भारत के संविधान में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि तीन विषयों – पुलिस, भूमि और सार्वजनिक व्यवस्था को छोड़कर – सभी अन्य विषयों और कार्यों पर चुनी हुई सरकार का सीधा नियंत्रण होगा, जो वर्तमान में अरविंद केजरीवाल की आप के अधीन है,”।

सिसोदिया ने कहा “2015 में, भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने संवैधानिक नियम की गलत व्याख्या करते हुए कहा कि एल-जी दिल्ली सरकार को चलाएगा। जब हम इसे चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट गए, तो शीर्ष अदालत की संविधान पीठ ने स्पष्ट किया कि दिल्ली में चुनी हुई सरकार को तीन विषयों को छोड़कर सभी फैसलों पर निर्णय लेने का अधिकार था। SC ने कहा था कि एल-जी को केवल दिल्ली सरकार के दिन-प्रतिदिन के फैसलों के बारे में सूचित करना होगा”।

उन्होंने कहा, “अब जबकि इसका कोई रास्ता नहीं है, भाजपा शासित केंद्र सरकार अब दिल्ली पर सीधे शासन करने के लिए संविधान और एससी की टिप्पणियों को नजरअंदाज कर रही है।”

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