क्या है स्वामित्व योजना, जानिए किस किस को मिलेगा लाभ ?

By Pradeep Shah

भारत के गाँवों में एक बड़ा हिस्सा ऐसा होता है, जिसे ‘आबादी इलाक़ा’ कहा जाता है. ये वो ज़मीन है, जिसके स्वामित्व के कागज़ात मालिकों के पास नहीं होते.

पीढ़ी दर पीढ़ी लोग इसे अपना मान कर हक़ जताते आए हैं. ऐसी ज़मीन पर मालिकाना हक़ के लिए काफ़ी झग़डे भी होते हैं. लेकिन आज़ादी के बाद से अलग-अलग राज्यों में ऐसे ‘आबादी इलाक़े’ में पड़ने वाली ज़मीन का ना तो कभी सर्वे किया गया और ना ही इसके लीगल कागज़ तैयार करने की कोई पहल की गई.

राज्यों को इस ज़मीन पर बने घर का प्रॉपर्टी टैक्स भी नहीं मिलता है.

हालाँकि इसी से मिलती जुलती एक पहल ओडिशा और तमिलनाडु सरकार ने की थी, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी कोई कोशिश अब तक नहीं हुई थी.

ऐसे ही ज़मीन पर बने घरों के मालिकाना हक़ के लिए भारत सरकार की ओर से एक नई पहल की गई है, जिसे ‘स्वामित्व स्कीम’ नाम दिया गया है.

इस योजना के तहत घर मालिकों को सर्वे के बाद ‘संपत्ति कार्ड’ दिया जा रहा है. अब लाभार्थियों के पास अपने घरों के मालिक होने का एक क़ानूनी दस्तावेज़ होगा.

रविवार को इस योजना की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत के गाँवों के लिए ऐतिहासिक क़दम बताया.

हालाँकि इस स्कीम से कितने लोगों को फ़ायदा पहुँचेगा, इसके बारे में कोई आधिकारिक आँकड़ा सरकार के पास मौजूद नहीं है. ना ही राज्य सरकारों के पास इस बारे में कोई आँकड़ा है कि किस राज्य में सबसे ज़्यादा आबादी इलाक़ा है.

स्कीम के फ़ायदे

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में नुपूर तिवारी एसोसिएट प्रोफे़सर हैं. डॉ. नूपुर तिवारी के मुताबिक़ स्वामित्व योजना घर मालिकों और सरकार दोनों के लिए ‘विन-विन’ वाला मामला है.

अब ‘संपत्ति कार्ड’ मिलने से लोग इसे दिखा कर बैंकों से क़र्ज़ ले सकेंगे. राज्य सरकारें चाहे तो उन इलाक़ों में सर्कल रेट तय कर सकती हैं. ज़मीन की ख़रीद और बिक्री आसान हो जाएगी. इससे सरकार को राजस्व का फ़ायदा होगा. इसका इस्तेमाल लोकल एरिया डेवलपमेंट में भी किया जा सकता है.

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ ग्राम पंचायतों की ओर से जितना प्रॉपर्टी टैक्स वसूल किया जाना चाहिए, उसका केवल 19 फ़ीसदी ही वसूल किया जाता है. ये आँकड़े 2018 के हैं.

अब इस योजना के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि इस टैक्स में भी इजाफ़ा होगा.

हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के एक लाख लाभार्थियों को उनके घरों के क़ानूनी काग़ज़ात सौंप कर रविवार को इस योजना की शुरुआत की गई है. देश भर के कुल 763 ज़िलों में इसका काम चल रहा है.

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