भूख के खिलाफ वैश्विक लड़ाई का नेतृत्व करना कितना मुश्किल, जानिए

By Vishal Joshi

संयुक्त राष्ट्र (UN) मानवीय संगठन, विश्व खाद्य कार्यक्रम (World Food Programme) को 2020 के नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

पृष्ठभूमि:

द्वितीय विश्व युद्ध के अनुभव ने इस तथ्य को चित्रित किया कि बचपन मे भूख और शांति परस्पर-विरोधी थे और वैश्विक भूख के मुद्दे को संबोधित करने का प्रयास किया गया था, तब से संयुक्त राष्ट्र के लिए प्रस्तावों के माध्यम से बहुपक्षीय प्रयासों के तहत खाद्य सहायता प्रदान की गयी जहां भी जरूरत थी।

1961 में, यूएस के कैनेडी प्रशासन ने विश्व खाद्य कार्यक्रम की स्थापना के लिए UN के प्रयासों का नेतृत्व रोम, इटली में किया। शुरू में इसके लिए तीन साल का जनादेश था।1965 तक, विश्व खाद्य कार्यक्रम ने दुनिया के लिए कई संकटों पर प्रतिक्रिया करके अपनी योग्यता साबित करी थी और संयुक्त राष्ट्र के एक पूर्ण-विकसित कार्यक्रम के रूप में प्रतिष्ठापित हुआ था ।

उपलब्धियां:

  • विश्व खाद्य कार्यक्रम दुनिया भर के जरूरतमंदों तक भोजन और अन्य सहायता पहुंचाने में लगा है।
  • WFP अब 80 से अधिक देशों में लगभग 100 मिलियन लोगों को सहायता प्रदान करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी मानवीय एजेंसी बन गई है ।
  • संगठन ने अपने परिचालन प्रेषण को व्यापक बना दिया है और अब वह न केवल आपातकालीन खाद्य सहायता के लिए एक अग्रणी प्रदाता है, बल्कि खाद्य सहायता कार्यक्रमों के माध्यम से समुदायों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं का समर्थन करने में लगी हुई है। इनमें स्कूल भोजन परियोजनाएं,इसी प्रकार के भोजन वितरण के पूरक के रूप में नकदी और वाउचर का प्रावधान शामिल हैं।
  • यह दुनिया भर में सबसे बड़े गैर-सैन्य और गैर-वाणिज्यिक लौजिस्टिक्स कार्यों में से एक को नियंत्रित करता है और भोजन और अन्य सहायता देने के साथ-साथ विकासात्मक सहायता, दुनिया के कुछ दूर और अक्सर संघर्ष-ग्रस्त हिस्सों में सहायता पहुंचाने में लगा हुआ है।
  • संगठन ने संकट की स्थितियों में सभी संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और गैर सरकारी संगठनों को फ्रंटलाइन दूरसंचार और लौजिस्टिक्स सहायता प्रदाता के रूप में सेवा करने की क्षमता भी विकसित की है।

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • विश्व खाद्य कार्यक्रम पूरी तरह से सरकारों, कंपनियों और व्यक्तियों जैसे दाताओं द्वारा वित्त पोषित है । यह कभी-कभी एजेंसियों को दानदाताओं की दया पर हानिकर स्थिति में रखता है।
  • सीरिया, यमन और अफगानिस्तान में चल रहे संघर्ष, जलवायु परिवर्तन से बढ़ रही चुनौतियां और COVID -19 महामारी के नतीजों से उत्पन्न भुखमरी के कगार पर लाखों लोग धकेल दिये गए हैं। इस तरह की उच्च मांगों को पूरा करने के लिए एजेंसी को अपने परिचालन संसाधनों को बढ़ाने की आवश्यकता होगी।
  • ऐसी चिंताएं हैं कि यह सहायता स्थानीय किसानों और व्यापारियों को नुकसान पहुंचाती है क्योंकि यह बाजार की कुछ परिस्थितियों को अस्थिर कर देता है जो प्रतिस्पर्धा के लिए छोटे स्थानीय उत्पादकों के लिए कठिन हो सकता है।

एक अनुमान के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर 690 मिलियन लोग भूख से प्रभावित हैं। यह मानवतावाद की भावना के खिलाफ है क्योंकि इन लोगों को शांति से और बिना भूख के जीने का अधिकार है। शांति के बिना, हम शून्य भूख के वैश्विक लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकते हैं; और जब भूख होगी, तो कभी भी शांतिपूर्ण दुनिया नहीं होगी

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