Afghanistan : सबसे बड़े शहर कंधार पर भी तालिबान का कब्जा, भारत की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली: अफगानिस्तान (Afghanistan) में सुरक्षाबलों और तालिबान के बीच संघर्ष जारी है. तालिबान लगातार अफगान के कई क्षेत्रों पर कब्जा जमाता जा रहा है. तालिबान (Taliban) ने शुक्रवार को अफगानिस्तान के दूसरे सबसे बड़े शहर कांधार (Kandahar) पर कब्जा करने का दावा किया. तालिबान के इस ऐलान के बाद अफगान सरकार के हाथ में राजधानी काबुल और कुछ अन्य क्षेत्र की बचे रहेंगे. तालिबानी और अफगान फौज की जंग में आम आदमी पिस रहे हैं.

अफगान सुरक्षा बलों के एक वरिष्ठ सूत्र ने विद्रोहियों के दावे की पुष्टि करते हुए शुक्रवार को एएफपी को बताया कि तालिबान ने प्रमुख शहर लश्कर गाह पर कब्जा जमा लिया है.

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तालिबान के एक प्रवक्ता ने ट्वीट में कहा, “कांधार को पूरी तरह से जीत लिया गया है. मुजाहिदीन शहर के शहीद चौक पर पहुंच गए हैं.” एक स्थानीय नागरिक ने भी तालिबान के इस दावे का समर्थन किया, उसने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि ऐसा लगता है कि सरकारी फौज शहर के बाहर स्थित एक सैन्य सुविधा से पीछे हट गई है.

अपने लोगों को निकालने का प्रयास कर रहा भारत

अफगानिस्तान के कई शहरों में मौत का मंजर नजर आ रहा है. अफगान सेना घुटने टेक रही है तो तालिबानी आतंकियों का कद बढ़ता जा रहा है. इस मुश्किल वक्त में अफगानिस्तान की सरकार जहां घुटने टेक रही है वहीं भारत-अफगानिस्तान में बसे अपने लोगों की सुरक्षा की चिंता कर रहा है.

अफगानिस्तान में चल रहे इस आतंकी तांडव के बीच कतर की राजधानी दोहा में बैठकों का दौर चला. जिसमें चीन, पाकिस्तान, रूस और अमेरिका के अलावा भारत को भी शामिल होने का न्योता दिया गया. भारत अफगानिस्तान में तेजी से बिगड़ रहे हालातों पर नजर बनाए हुए है. इन हालातों को ध्यान में रखते हुए कई फैसले किए जा रहे हैं.

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लोगों और मीडिया कर्मियों के लिए एडवाइजरी

भारत सरकार ने अफगानिस्तान में रह रहे लोगों से इस एडवाइजरी को गंभीरता से लेने की सलाह दी है. अफगानिस्तान में रिपोर्टिंग कर रहे मीडिया कर्मियों के लिए भी चेतावनी जारी की गई है. हालांकि सैन्य सहयोग को लेकर अभी किसी तरह का फैसला नहीं लिया गया है.

इस बीच, अमेरिका अफगानिस्तान में अस्थायी तौर पर करीब 3000 सैनिकों को भेज रहा है. ये सैनिक किसी लड़ाई में हिस्सा नहीं लेंगे बल्कि ये काबुल से अमेरिकी राजनयिकों और उसके सहयोगियों को सुरक्षित बाहर निकालने के मकसद से किया जा रहा है. ये काबुल के करजई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर तैनात होंगे. अमेरिका में काबुल के अपने दूतावास में राजनयिकों की तादाद और घटाने का फैसला किया है.

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