दिल्ली दौरे के बाद अब उद्धव ठाकरे और शरद पवार से मिलने मुंबई जाएंगी CM ममता, कांग्रेस को दे सकती हैं बड़ा झटका

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamta Banerjee) ने दिल्ली दौरे पर सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) से मुलाकात न कर और कई बड़े कांग्रेसी नेताओं को टीएमसी जॉइन करा कर राष्ट्रीय राजनीति में दखल बढ़ाने के संकेत देने शुरू कर दिए हैं। साल 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विस्तार में जुटी हैं और राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ममता अपनी पार्टी को बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस के विकल्प के तौर पर पेश कर रही है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी सुप्रीमो शरद पवार (Sharad Pawar) से मिलने के लिए मंगलवार को सीएम ममता बनर्जी जल्द ही मुंबई का दौरा करेंगी।

टीएमसी कांग्रेस के कई ‘मोहभंग’ नेताओं को अपने पाले में लाने में सफल रही है, जिसमें गोवा के पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री लुइज़िन्हो फलेरियो भी शामिल हैं। टीएमसी ने मेघालय में 18 में से 12 कांग्रेस विधायकों को भी अपने पाले में कर लिया। इससे टीएमसी राज्य विधानसभा में प्रमुख विपक्ष बन गई है। टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने उनकी मुंबई यात्रा की पुष्टि करते हुए कहा कि ममता बनर्जी बीजेपी के खिलाफ एक मजबूत विपक्षी चेहरा हैं।

ममता बनर्जी के गोवा, यूपी, मेघालय, त्रिपुरा और असम में तृणमूल कांग्रेस का विस्तार करने के बाद दिसंबर के पहले सप्ताह में राजस्थान का दौरा करने की भी संभावना है। तृणमूल आगामी गोवा विधानसभा चुनाव लड़ने की योजना बना रही है और पार्टी त्रिपुरा में चल रहे नगर निकाय चुनाव में भी अपनी किस्मत आजमा रही है। अपनी दो दिवसीय मुंबई यात्रा के दौरान, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के राज्य में निवेश के लिए कुछ व्यापारिक प्रमुखों से मिलने की भी संभावना है।

कांग्रेस को झटका देने की तैयारी में

विधानसभा चुनाव जीतने के बाद ममता लगातार पार्टी के विस्तार में जुटी हैं। टीएमसी पश्चिम बंगाल में भाजपा के नेताओं और विधायकों तो अन्य भारतीय राज्यों में कांग्रेस के नेताओं और विधायकों का लगातार शिकार कर रही है। ताजा मामला मेघालय का है, जहां कांग्रेस के 12 विधायकों ने टीएमसी का दामन थाम लिया है। जानकारों की माने तो टीएमसी की नज़र देश में प्रमुख विपक्षी दल के रूप में कांग्रेस को रिप्लेस करने पर है। 2024 के चुनाव भले ही दूर हैं लेकिन टीएमसी को कांग्रेस से अधिक लोकसभा सीटें मिलने को इस दावे का आधार बनाया जा सकता है।

लोकसभा चुनावों में टीएमसी का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2014 में था, जब उसने पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से 34 सीटों पर 39।8% वोट शेयर के साथ जीत हासिल की थी। 2021 के विधानसभा चुनावों में टीएमसी का वोट शेयर 48।5% था। संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के अनुसार 2021 विधानसभा क्षेत्र के परिणामों के आकलन पर राज्य की 42 लोकसभा सीटों में से 32 सीटों पर टीएमसी को बढ़त मिली थी। आज की जो स्थिति है उसके मुताबिक, बीजेपी पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले की तुलना में एक कमजोर हुई है। इसका मतलब यह है कि टीएमसी 2024 पश्चिम बंगाल से लोकसभा की अपनी संख्या 2019 से काफी ऊपर ले जाने की उम्मीद कर रही होगी।

कांग्रेस की हालत खराब

कांग्रेस 2019 के आम चुनावों में 52 लोकसभा सीटें जीतने में सफल रही थी। इनमें से 31 सिर्फ तीन राज्यों: केरल (15) और पंजाब (8) और तमिलनाडु (8) से आई थीं। 2021 के केरल विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन काफी खराब रहा। तमिलनाडु में कांग्रेस की किस्मत द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के साथ सीट बंटवारे के फॉर्मूले पर निर्भर करेगी।

उधर पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के बाहर होने से पार्टी को विभाजन का सामना करना पड़ा है। असम में कांग्रेस को 2019 में तीन लोकसभा सीटें हासिल हुईं थी। हालांकि भले ही टीएमसी लोकसभा सीटों के मामले में कांग्रेस को पछाड़ने में कामयाब हो जाए, लेकिन प्राथमिक विपक्षी दल के रूप में पहचाने जाने के उसके दावे की विश्वसनीयता नहीं होगी। 2019 के आम चुनावों में, कांग्रेस का अखिल भारतीय वोट शेयर 19।5% था जबकि टीएमसी ने जब 2014 के आम चुनावों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हासिल किया था, तब भी उसका राष्ट्रीय वोट शेयर सिर्फ 4।1% था।

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