Climate Change Report : जलवायु परिवर्तन पर नई रिपोर्ट ने बजाई खतरे की घंटी

नई दिल्ली: Climate Change Report : धरती का तापमान बढ़ने यानी ग्लोबल वार्मिंग का खतरा (Global Warming) हमारी आशंकाओं से भी कहीं ज्यादा गहरा है. संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन पैनल की ताजा रिपोर्ट ने इस पर मुहर लगा दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि शहर ग्लोबल वार्मिंग के हॉटस्पॉट बन गए हैं, क्योंकि वहां वातावरण को ठंडा रखने के पानी और वनस्पति के स्रोतों की कमी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर समुद्र का जल स्तर (sea level) 1901 से 2018 के बीच औसतन 0.20 मीटर बढ़ा है.

अमेरिका के वायुमंडलीय अनुसंधान के लिये राष्ट्रीय केंद्र की वरिष्ठ जलवायु वैज्ञानिक और इस रिपोर्ट की सह-लेखक लिंडा मर्न्स ने कहा, “इस बात की गारंटी है कि चीजें और बिगड़ने जा रही हैं. मैं ऐसा कोई क्षेत्र नहीं देख पा रही जो सुरक्षित है…कहीं भागने की जगह नहीं है, कहीं छिपने की गुंजाइश नहीं है.” वैज्ञानिक हालांकि जलवायु तबाही की आशंका को लेकर थोड़ी ढील देते हैं.

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जलवायु परिवर्तन पर अधिकार प्राप्त अंतर सरकारी समिति (आईपीसीसी) की रिपोर्ट जलवायु परिवर्तन को पूर्णत: मानव निर्मित और “स्पष्ट” करार देती है. यह रिपोर्ट पिछली बार 2013 में जारी रिपोर्ट की तुलना में 21वीं सदी के लिये ज्यादा सटीक और गर्मी की भविष्यवाणी करती है.

हालांकि कार्बन डाई आक्साइड या धरती का तापमान बढ़ाने वाली अन्य ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी जलवायु परिवर्तन के असर को ज्यादा घातक होने से बचाया जा सकता है. लेकिन सभी देशों को इस पर सहमति दिखानी होगी. इस साल ब्रिटेन के ग्लासगो शहर में बड़े कार्बन उत्सर्जक देशों की बैठक होने वाली है, इसमें प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों में भारी कमी लाने का लक्ष्य है.

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फिर भी पृथ्वी के वैश्विक औसत तापमान (global temperatures) को स्थिर करने में 20 से 30 साल लग जाएंगे. हालांकि हवा की गुणवत्ता में तुरंत सुधार देखने को मिलेगा. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटारेस ने पैनल की रिपोर्ट को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर अब तक सबसे विस्तृत आकलन करार दिया है.

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