क्या लिव-इन में किया सेक्स दुष्कर्म हो सकता है ?, SC ने क्या कहा जानिए

सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ रहने वाले एक जोड़े के बीच सहमति से सेक्स के मुद्दे की जांच करते हुए यह जानने की कोशिश की है कि क्या उनके बीच संभोग को बलात्कार कहा जा सकता है। शीर्ष अदालत ने अपने पूर्व साथी पर आठ सप्ताह तक बलात्कार के आरोपी व्यक्ति की गिरफ्तारी पर भी रोक लगा दी और कहा कि मुकदमे में याचिकाकर्ताओं की स्वतंत्रता के सवाल पर ट्रायल कोर्ट फैसला करेगी।

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और वी रामसुब्रमण्यम की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, “अगर कोई दंपति एक साथ पुरुष और पत्नी के रूप में रह रहा है … पति क्रूर हो सकता है, लेकिन क्या दंपति, जो एक साथ रह रहे हैं, के बीच संभोग को दुष्कर्म कहा जा सकता है?”

क्या है मामला ?

एक महिला द्वारा व्यक्ति दुष्कर्म के आरोप की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने ये टिप्पणियां की, जो दो साल से उसके साथ लिव-इन रिलेशनशिप मे थी। पुरुष के दूसरी महिला से शादी करने के बाद महिला ने दुष्कर्म की FIR दर्ज की थी।

आरोपियों का प्रतिनिधित्व करने वाली वरिष्ठ वकील विभा दत्ता मखीजा ने पीठ के समक्ष दलील दी कि दंपति साथ काम करते थे और वे दो साल से लिव-इन रिलेशनशिप में थे। शीर्ष अदालत की खंडपीठ ने हालांकि कहा कि “शादी का झूठा वादा करना गलत है।”

SUPREME COURT
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शिकायतकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता आदित्य वशिष्ठ के अनुसार, युगल एक रोमांटिक रिश्ते में था, लेकिन उस महिला ने शादी से पहले यौन संबंध बनाने से पूरी तरह से इनकार कर दिया था। वशिष्ठ ने तर्क दिया कि उनके क्लाइंट की सहमति धोखे से प्राप्त की गयी थी।

शीर्ष अदालत को सूचित किया गया कि दंपति मनाली गए थे, जहां उन्होंने एक शादी की रस्म में भाग लिया। याचिकाकर्ता ने इस बात से इनकार किया कि कोई भी शादी हुई थी, इसके बजाय, वह लिव-इन रिलेशनशिप में थी, जहां उनकी सहमति थी।

2019 में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता द्वारा उसके खिलाफ की गयी एफआईआर को रद्द कर दिया था और याचिका पर ध्यान देने से इनकार कर दिया था।

याचिकाकर्ता, अधिवक्ता फुजैल अहमद अय्युबी के माध्यम से, इस ऑर्डर को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत चली गई। महिला के वकील ने इस बात पर प्रकाश डाला कि याचिकाकर्ता ने उनके मुवक्किल को तब भी पीटा था जब वे साथ रह रहे थे और शादी के वास्तविक होने का विश्वास दिलाकर धोखे से संभोग के लिए सहमति प्राप्त की थी।

पीठ ने कहा, “किसी को भी शादी का झूठा वादा नहीं करना और तोड़ना चाहिए। लेकिन यह कहना अलग है कि संभोग का कार्य बलात्कार है।” पीठ ने उल्लेख किया कि उसने इस मामले को अपने पहले के फैसले में सुलझा लिया था।

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