पुण्यतिथि : आखिर क्यों जल्लादों ने मंगल पांडे को फांसी पर चढ़ाने से मना कर दिया

08 अप्रैल 1857. बंगाल की बैरकपुर छावनी का माहौल उस दिन बहुत उदास और बोझिल सा था. सुबह जब रेजिमेंट के सिपाही रातभर की नींद के बाद तड़के उठने की तैयारी कर रहे थे, तभी उन्हें पता चला कि तड़के मंगल पांडे को फांसी दे दी गई है. इसके बाद पूरी छावनी में तनाव पसर गया. किसी को अंदाज नहीं था कि मंगल पांडे को समय से 10 दिन पहले ही फांसी पर चढ़ा दिया जाएगा. उनकी फांसी की सजा तो 18 अप्रैल को मुकर्रर की गई थी.

ब्रितानी हुकूमत के खिलाफ अगर आजादी की लड़ाई की पहली चिंगारी असल में मंगल पांडे भड़काई थी. वो हमारे ऐसे नायक थे, जिन्होंने पूरे देश को झकझोर कर जगा दिया था. ईस्‍ट इंडिया कंपनी के खिलाफ क्रांति की शुरुआत करने वाले मंगल पांडे ने बैरकपुर में 29 मार्च 1857 को अंग्रेज अफसरों पर हमला कर घायल कर दिया था. कोर्ट मार्शल के बाद उन्‍हें 18 अप्रैल 1857 को फांसी देनी तय की गई थी लेकिन हालत बिगड़ने की आशंका के चलते अंग्रेजों ने गुपचुप तरीके से 10 दिन पहले उन्हें फंदे पर लटका दिया.

बैरकपुर छावनी के सिपाही नंबर 1446

वह कलकत्‍ता (अब कोलकाता) के पास बैरकपुर की सैनिक छावनी में 34वीं बंगाल नेटिव इंफैंट्री की पैदल सेना के सिपाही नंबर 1446 थे. उनकी भड़काई क्रांति की आग से ईस्‍ट इंडिया कंपनी (East India Company) हिल गई थी.

उन्‍हें बैरकपुर में 29 मार्च की शाम अंग्रेज अफसरों पर गोली चलाने और तलवार से हमला करने के साथ ही साथी सैनिकों को भड़काने के आरोप में मौत की सजा (Capital Punishment) सुनाई गई. उस समय बैरकपुर छावनी में फांसी की सजा देने के लिए जल्लाद रखे जाते थे लेकिन उन जल्लादों ने मंगल पांडे को फांसी देने से साफ मना कर दिया. तब अंग्रेजों ने बाहर से जल्लाद बुलाए.

कलकत्‍ता से बुलाने पड़े थे जल्‍लाद

बैरकपुर में कोई जल्‍लाद नहीं मिलने पर ब्रिटिश अधिकारियों ने कलकत्‍ता से 04 जल्‍लाद बुलाए. यह समाचार मिलते ही कई छावनियों में ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ असंतोष भड़क उठा. इसी वजह से आनन फानन में करीब चुपचाप मंगल पांडे को 8 अप्रैल 1857 की तड़के जल्दी ही फांसी पर लटका दिया गया.

इतिहासकार किम ए. वैगनर की किताब ‘द ग्रेट फियर ऑफ 1857 – रयूमर्स, कॉन्सपिरेसीज एंड मेकिंग ऑफ द इंडियन अपराइजिंग’ में बैरकपुर में अंग्रेज अफसरों पर हमले से लेकर मंगल पांडे की फांसी तक के घटनाक्रम के बारे में सिलसिलेवार तरीके से जिक्र किया गया है.

29 मार्च को क्यों क्षुब्ध हुए थे मंगल पांडे

ब्रिटिश इतिहासकार रोजी लिलवेलन जोंस की किताब ‘द ग्रेट अपराइजिंग इन इंडिया, 1857-58 अनटोल्ड स्टोरीज, इंडियन एंड ब्रिटिश में बताया गया है कि 29 मार्च की शाम मंगल पांडे यूरोपीय सैनिकों के बैरकपुर पहुंचने को लेकर बेचैन थे. उन्‍हें लगा कि वे भारतीय सैनिकों को मारने के लिए आ रहे हैं. इसके बाद उन्‍होंने अपने साथी सैनिकों को उकसाया और ब्रिटिश अफसरों पर हमला किया.

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