आपातकालीन स्थिति में पहुंचा दिल्ली का प्रदूषण! बाहर जाने की मनाही

नई दिल्ली: दिल्ली में वायु गुणवत्ता के हालात दिन पर दिन खराब होते जा रहे हैं। दिल्ली में वायु गुणवत्ता का स्तर आपातकालीन स्तर के करीब पहुंच गया। प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों ने राष्ट्रीय राजधानी में लोगों से बाहरी गतिविधियों को सीमित करने के लिए कहा है और सरकारी और निजी कार्यालयों से वाहनों के उपयोग में कम से कम 30 प्रतिशत की कटौती करने को कहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के शुक्रवार शाम 4 बजे के बुलेटिन के मुताबिक, दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 471 था, जो इस मौसम में अब तक का सबसे खराब स्तर है। गुरुवार को 411 थी।

दिल्ली के प्रदूषण को बढ़ाने के प्रमुख कारणों में से एक है खेतों की आग। ग्रामीण इलाकों में पराली जलाने के कारण दिल्ली के वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) पर एक उप-समिति ने कहा कि 18 नवंबर तक प्रदूषकों के फैलाव के लिए मौसम संबंधी स्थितियां अत्यधिक प्रतिकूल होंगी और संबंधित एजेंसियों को “आपातकालीन” श्रेणी के तहत उपायों को लागू करने के लिए पूरी तरह से तैयार रहना चाहिए।

चेतावनी के बाद, माता-पिता ने अपने बच्चों को घर पर रखना शुरू कर दिया है क्योंकि जिस लोगों को दमें की या सांस बीमारी है उन लोगों के लिए विशेष रूप से खतरनाक हैं। आईएमडी के पर्यावरण और अनुसंधान विभाग के प्रमुख वीके सोनी ने कहा प्रदूषण में यह स्पाइक कई चीजों का समामेलन है। दिवाली के बाद दिल्ली में प्रदूषण का स्तर पहले से ही चरम पर है और पंजाब और हरियाणा में पराली की संख्या अधिक है। धीमी हवाओं के कारण प्रदूषण का भार कम नहीं हो रहा है, और अधिक प्रदूषण जोड़ा जा रहा है। यह सब हवा में फिर से प्रसारित किया जा रहा है

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