सच्चिदानंद जोशी की कहानी संग्रह पुत्रिकामेष्ठी पर परिचर्चा

लेखक: रंजना बिष्ट

नई दिल्ली: सुप्रसिद्ध कहानिकार, कवि एवं शिक्षाविद् सच्चिदानंद जोशी की पुस्तक पुत्रिकामेष्टि का लोकार्पण कार्यक्रम कांस्टीट्यूशन क्लब संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार श्री अच्युतानंद मिश्र ने कहा कि उनकी लेखन शैली में अदभुत किस्सागोई है, वह कथाकार ही नही बहुत अच्छे कवि और पत्रकारिता के बहुत अच्छे जानकार है, उनका रंगमंच से भी बहुत गहरा नाता है, उनकी खासियत हैं की वह हमेशा अनेक विधाओं में सक्रिय रहते हैं, वशिष्ट अतिथि एवं वरिष्ठ कथाकार श्री महेश दर्पण ने कहा कि व्यक्ति को जानने के लिए संबंध की नही नजर की जरूरत होती है,

मैं जोशी जी को कुछ अल्पविराम पुस्तक से जानता हूं, लेखक पुस्तक के माध्यम से कहना चाहते हैं की हम अपने आस पास नजर दौड़ाएं, सामाजिक परिवर्तन होना कितना मुश्किल है, यह बात पुत्रिकामेष्टि पढ़ने से ज्ञात होता है, जिसमें धड़कती संवेदना की कहानियां हैं, आत्मीयता खरीदी नही जाती, मनुष्य को सही रूप में जानने वाले लोग बहुत कम हैं, इनकी कहानियां ऐसी साबित होंगी जैसे एक समय में चेखव ने समाज को बदलने की कोशिश की थी।

इस अवसर पर मीडिया विशेषज्ञ श्री लक्ष्मी शंकर वाजपेई ने कहा कि जब भी उनकी कविता पढ़ता या सुनता हूं तो कामना करता हूं की वह दूर दूर तक जाए, इनकी कविता का भुगोल बहुत व्यापक है, इनका शिल्प छंदमुक्त होते हुए भी छंद का आनंद प्रदान करता है, आपकी चेतना को विस्तार देती हैं, उनकी हर कहानी आपकी आंखों को नम करती हैं, जिसमें गहरी मानवीय संवेदना और सरोकार मिलेंगे । यही खूबी एक मनुष्य को महान रचनाकार बनाती हैं।

इस अवसर पर कथाकार बलराम जी ने जोशी जी की लिखी कहानी नमाज के विषय में कहा कि ऐसी कहानियां बहुत कम लिखी जाती हैं, इस कहानी से पता चलता है कि भारतीय समाज में आज भी हिन्दू मुस्लिम एक दूसरे से गूथे हुए हैं,

पुस्तक के लेखक और कहानीकार सच्चिदानंद जोशी ने अंत में स्वरचित कविताओं तथा , ‘बेसन की पपड़िया’ तथा ‘अपना घर ‘ नामक कहानी का पाठ कर श्रोताओं का मन मोह लिया।

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