कोरोना के कहर से लेकर किसान आंदोलन के स्थगन तक, यह हैं साल 2021 की बड़ी घटनाएं

साल 2021 कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा है। जहां साल की शुरूआत में कोरोना को लेकर सरकार और आम आदमी दोनों की तरफ से लापरवाही बरती जानें के कारण, कोरोना की दूसरी लहर का लोगों ने तांड़व देखा वहीं कई तो दूसरी और राजनीति में भी कई कड़े उतार-चढ़ाव दिखाई पड़े। साल 2021 में कई बड़े विवादों ने भी जन्म लिया। विवादों के कारण साल 2021 राजनीतिक रुप से काफी अशांत ता वहीं भाजपा सरकार को इससे काफी नुकसान हुआ। राजनीति के साथ साथ 2021 में बॉलीवुड, खेल और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी कई बड़ी घटनाएं हुआ है, जिनकी संक्षिप्त में जानकारी आज हम आपको इस लेख में देंगे।

कोरोना वायरस की दूसरी लहर

साल की शुरूआत में ही कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने भारत में दस्तक दी और कोरोना के डेल्टा स्वरूप ने लाखों जिंदगियों को नगल लिया। कोरोना का कहर इस कदर भारतीयों पर पड़ा कि भारत की मेडिकल व्यवस्था का दम ही निकल गया। सांसों के लिए लोग तरस रहे थे। कोरोना पीड़ितों के परिवारवाले कई दिनों से ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए लाइन में लगे रहे और उनके मरीज ने दम तोड़ दिया। अस्पताल में मरीजों का ऐसा ढेर लगा था बेड कम पड़ गये, फर्श भर गया और डॉक्टर्स टॉयलेट में बिठाकर भी मरीजों का इलाज कर रहे थे। स्थिति इतनी गंभीर थी कि लोगों के दिलों में खौफ बैठ गया था कि आखिर इस साल हम जिंदा रहेंगे या नहीं! ऐसी स्थिति देखकर सरकारों के हाथ-पैर फूल गये। लॉकडाउन लगा दिया गया लेकिन संक्रमित मरीजों की रोजाना जो संख्या आ रही थी वो दिल दहरा देने वाली थी। दूसरी लहर के दौरान रोजाना संक्रमितों की सख्या 4 लाख आने लगी थी।

शमशान घाट की कमी,  नदियों में लाशों के बहने का सिलसिला

कोरोना वायरस की दूसरी लहर के दौरान जो मौत के सरकारी आंकड़े दिखाए जा रही थे उस पर बिल्कुल भी यकीन करने की एक भी वजह नहीं थी। दिल्ली, मुबंई और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में कोरोना के कारण होने वाली मौत की संख्या इतनी ज्यादा थी कि शमशान घाट में लोगों को अपनों का अंतिम संस्कार करने के लिए 52-53 घंटे का इंतजार करना पड़ रहा था। शमशान घाट में शवों का अंतिम संस्कार करने की जगह नहीं बची थी। घाट के बाहर शवों की लाइन देखी जा सकती थी लेकिन सरकारी आंकड़ों में यह संख्या आंधी से भी कम दिखायी जा रही थी। इसका कारण भी था क्योंकि सरकार के पास सभी मरीजों के आंकड़े नहीं पहुंच रहे थे अस्पतालों में बेड नहीं थे जिसके कारण ज्यादातर लोगों का इलाज घर से ही चल रहा था।

कोरोना काल के दौरान हमने उत्तर प्रदेश की नदियों में कई शवों को बहते हुए देखा जो किनारों पर आकर टिक गये थे। शवों को कूत्ते और जनवर नौंच-नौंच कर खा रहे थे। यह दृश्य इतना डरावना था कि मानों लग रहा था कि यह संसार अब अपने पतन की ओर बढ़ गया है। नदियों में तैरती उन लाशों की तस्वीर को जिसने भी देखा वह सदमें में चला गया।

किसान आंदोलन

भारत सरकार किसानों के हित में तीन नये बिल संसद में लेकर आयी। सरकार ने इस बिल को किसानों का हितैशी बताया लेकिन किसानों ने इसे काला कानून कहा और सरकार से बिल को वापस लेने की मांग करने लगे। सरकार और किसानों के बीच कई दौर की बातचीत हुई लेकिन दोनों पक्षों के बीच बात नहीं बनी और किसान घरने पर बैठ गये। यह आंदोलन काफी लंबे समय तक चलता रहा। किसान नेताओं द्वारा आंदोलन को शक्तिशाली बनाने के लिए समय समय पर ट्रक्टर मार्च, रैली, भारत बंद जैसी चीजों का आयोजन किया जाता रहा।

गणतंत्र दिवस पर किसानों की हिंसा

जो देश के लिए गौरव का दिन होता है उस दिन उपद्रवियों के कारण देश पूरी दुनिया के सामने किसानों के कारण शर्मशार हो गया। किसान तो अन्नदाता होते हैं लेकिन 26 जनवरी 2021 के दिन यह कथित तौर पर अपने आपको किसान कहने वाले वह उपद्रवी किसी उग्रवादी से कम नहीं थे। किसानों ने अपना विरोध प्रदर्शन करने के लिए 26 जनवरी 2021 को ट्रैक्टर परेड निकाली और यह परेड देखते ही देखते हिंसात्मक हो गयी। परेड के कुछ युवकों ने लाल किलें में तोड़फोड़ की और तिरंगा हटाकर धार्मिक झंडा फहराया। इस घटना ने आंदोलन को बहुत नुकसान पहुंचाया।

साल 2021 भारत के पांच राज्यों मे विधानसभा चुनाव

राजनीति के लिहाज से साल 2021 भारत की सभी नेशनल पार्टियों के लिए अहम था क्योंकि 2021 में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव होने वाले थे, जिसका असर साल की शुरूआत में ही देखने को मिल गया था। 2021 में पश्चिम बंगाल, असम, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने कमर कस ली थी। चुनावी गणित भी लगने शुरू हो गये थे। दल बदल की राजनीति भी जोर पर थी। चुनाव प्रचार अभियान शुरू हो गये थे। भाजपा को पश्चिम बंगाल में अपनी सरकार बनाने की उम्मीद थी। वहीं ममता बनर्जी अपनी सीएम की कुर्सी तीसरी बार बनाये रखना चाहती थी। प्रचार के दौरान रैलियों में राजनैतिक जुमलों की बहार आ गयी थी। सभी नेशनल पार्टियां प्रचार में जुटी हुई थी।

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की ऐतिहासिक जीत

चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी ने कई नारे दिए थे जैसै- 2 मई ममता दीदी गयी.., अबकी बार दीदी का सूपड़ा साफ… लेकिन इन जुमलों पर ममता बनर्जी का खेला होबे भारी पड़ गया और ममता बनर्जी को चुवान में बंपर जीत हासिल हुई और बीजेपी शतक लगाने से भी चूक गयी। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने 200 से ज्यादा सीटों जीत कर तीसरी बार मुख्यमंत्री बनीं।

पेगासस मामले पर बवाल

मानों साल 2021 भाजपा के लिए कुछ परेशान करने वाला रहा हो। चुनाव में हारने के बाद विपक्ष के पास सरकार को घेरने का एक और मिल गया वो था पेगासस जासूसी कांड। सरकार पर विपक्ष द्वारा आरोप लगाया गया कि सरकार ने पेगासस स्पाईवेयर के इस्तेमाल से भारत के कई पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के फ़ोन हैक किए है और उनकी जाजूसी की है। इस मुद्दे को विपक्ष ने इतना खीचा कि संसद का मनासून सत्र एक दिन भी नहीं चल सका। जैसे ही संसद में कार्यवाई शुरू होती पेगासस को लेकर विपक्ष हंगमा शुरू कर देता था। विपक्ष पेगासस पर सरकार से जवाब चाहता था, सरकार अपने जवाब में यह कह रहा था कि “लॉफ़ुल इंटरसेप्शन” या क़ानूनी तरीके से फ़ोन या इंटरनेट की निगरानी या टैपिंग की देश में एक स्थापित प्रक्रिया है जो बरसों से चल रही है। जवाब से विपक्ष बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हो रहा था। नतीजन संसद का पूरा मानसून सत्र खत्म हो गया लेकिन काम एक भी नहीं हुआ।

केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार 2021

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट का विस्तार भी साल 2021 की मुख्य घाटनाओं में से एक रहा है। इस बार का कैबिनेट का विस्तार इस लिए भी चर्चा का विषय रहा था क्योंकि विपक्ष से सरकार के केई मंत्रियों को इनके बयान और काम को लेकर घेरा। सरकार किसी भी तरह का विपक्ष को मौका नहीं देना चाहती थी इस लिए केबिनेट में फेरबदल की गयी। इसमें 36 नए चेहरों को शामिल किया गया है जबकि सात मौजूदा राज्यमंत्रियों को पदोन्नत कर मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। आठ नए चेहरों को भी कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया। राष्ट्रपति भवन में हुए शपथ ग्रहण समारोह में 43 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली, जिसमें 15 कैबिनेट और 28 राज्यमंत्री शामिल थे. इस बार पीएम मोदी ने यूथ, एक्सपीरियंस और प्रोफेशनल्स पर फोकस किया था।

कई भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री बदले गये

गुजरात, कर्नाटक, उत्तराखंड सहित भाजापा शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आलाकमान द्वारा बदला गया। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने अचानक इस्तीफा दे दिया। रूपाणी से पहले कर्नाटक में जुलाई में बीएस येदियुरप्पा को कुर्सी छोड़नी पड़ी। बीएस येदियुरप्पा से पार्टी के कई नेता नाराज चल रहे थे। इससे पहले उत्तराखंड में भी त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। असम को भी बीजेपी ने हाल ही में नया नेतृत्व दिया है। सर्बानंद सोनेवाल को पांच साल बाद भाजपा ने हिमंत बिस्व सरमा को कमान सौंप दी।

सिनेमा जगत में भी रही हलचल

साल 2021 में सिनेमा जगत में भी काफी हलचल देखने को मिली। सबसे पहले कंगना रनौत की तरफ से किसानों को लेकर दिए गये बयानों पर काफी हंगामा हुआ। उसके बाद शिल्पा शेट्टी के पति राजकुंद्रा को अश्लील फिल्म निर्माण मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। तीन महीने जेल में रहने के बाद कुंद्रा को कोर्ट से जमानत मिली थी। इसके बाद बारी आयी आर्यन खान की। शाहरूख खान के बेटे को कू्रज पर रेव पार्टी के दौरान एनसीरबी ने गिरफ्तार किया। एनसीबी ने शिप से 8 नामी चेहरों को गिरफ्तार किया था जिसमें से एक शाहरूख खान के बेटे आर्यन भी थी। इस गिरफ्तारी से काफी बवाल भी मचा था। इस दौरान कई बड़ी हस्तियों ने दुनिया कों अलविदा भी कहा। बिग बॉस के विनर सिद्धार्थ शुक्ला का दिल का दौरा पड़े ने अचानक निधन हो गया था। इसके तुरंत बाद खबर आयी कि लोकप्रिय कन्नड़ फिल्म अभिनेता पुनीत राजकुमार का भी दिल का दौरा पड़ने से अचानक निधन हो गया।

विराट कोहली की कप्तानी का अंत

भारत के सीमित ओवरों के कप्तान के रूप में विराट कोहली के युग का अंत टी20 विश्व कप के साथ ही हो गया। अब विराट से एक दिवसीय मैच की भी कप्तानी लेकर रोहित शर्मा को दे दी गयी है। बीसीसीआई चयन पैनल ने रोहित शर्मा को टी 20 और एकदिवसीय मैचों में नए कप्तान के रूप में नामित किया।

अफगानिस्तान में तालिबानी सरकार

20 साल बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान से अपने सैनिकों को वापस बुला लिया जिसके बात अफगानिस्तान में तालिबान एक बार फिर उग्र हो गया। तालिबान ने कुछ ही दिनों में पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया और अपनी सरकार बना ली। अफागानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी रातों रात अपनी जनता को छोड़ कर विदेश भाग गये।

भारत के पहले सीडीएस बिपिन रावत का हेलीकॉप्टर दुर्घटना में निधन

तमिलनाडु के नीलगिरी जिले के कुन्नूर में भारतीय वायुसेना का एमआई-17वी5 हेलीकॉप्टर क्रैश हो जाने के दर्दनाक हादसे से न केवल भारतीय सेना के तीनों अंग बल्कि समूचा देश गहरे सदमे में है। वायुसेना द्वारा इस दुर्घटना के कारण जानने के लिए जांच का आदेश दे दिया गया है। दरअसल इस हादसे में हेलीकॉप्टर में सवार सीडीएस बिपिन रावत और उनकी पत्नी के अतिरिक्त 11 लोगों की मौत ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है। हादसे का शिकार हुए हेलीकॉप्टर को विंग कमांडर पृथ्वी सिंह उड़ा रहे थे। हेलीकॉप्टर सुलुर के आर्मी बेस से निकलने के बाद जनरल रावत को लेकर वेलिंगटन सैन्य ठिकाने की ओर बढ़ रहा था और सुलूर से करीब 94 किलोमीटर दूर हेलीकॉप्टर अचानक हादसे का शिकार हो गया। किसी भी वीवीआईपी दौरे में इसी हेलीकॉप्टर का उपयोग किया जाता है। हादसे के शिकार हुए हेलीकॉप्टर की तुलना चिनूक हेलीकॉप्टर से की जाती थी, जो डबल इंजन हेलीकॉप्टर था, जिससे इसके एक इंजन में कोई खराबी आने पर दूसरे इंजन के सहारे सुरक्षित लैंडिंग कराई जा सके।

Leave a Reply