विवादित Retrospective Tax खत्म करेगी सरकार,कैबिनेट ने दी मंजूरी

नई दिल्ली: सरकार एक पूर्वव्यापी टैक्स कानून को खत्म करने जा रही है. 2012 के विवादित Retrospective Tax कानून के कारण केयर्न और वोडाफोन जैसी फर्मों ने मुकदमा दायर किया था. कैबिनेट ने 2012 के विवादास्पद कानून को पूर्ववत करने के लिए आज एक विधेयक को मंजूरी दी है. केंद्र भुगतान की गई राशि को बिना ब्याज के वापस करने के लिए तैयार है. भारत वोडाफोन के खिलाफ मुकदमा हार गया था और पिछले साल दिसंबर में एक अपील दायर की थी.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच ‘कराधान विधि (संशोधन) विधेयक, 2021’ पेश किया. इसके तहत भारतीय परिसंपत्तियों के अप्रत्यक्ष हस्तांतरण पर कर लगाने के लिए पिछली तिथि से लागू कर कानून, 2012 का इस्तेमाल करके की गई मांगों को वापस लिया जाएगा.

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विधेयक में कहा गया है, ‘‘इन मामलों में भुगतान की गई राशि को बिना किसी ब्याज के वापस करने का भी प्रस्ताव है.’’ इस विधेयक का सीधा असर ब्रिटेन की कंपनियों केयर्न एनर्जी और वोडाफोन समूह के साथ लंबे समय से चल रहे कर विवादों पर होगा. भारत सरकार पिछली तिथि से लागू कर कानून के खिलाफ इन दोनों कंपनियों द्वारा किए गए मध्यस्थता मुकदमों में हार चुकी है. वोडाफोन मामले में हालांकि सरकार की कोई देनदारी नहीं है, लेकिन उसे केयर्न एनर्जी को 1.2 अरब अमेरिकी डॉलर वापस करने हैं.

केयर्न एनर्जी और वोडाफोन को फायदा

सरकार के इस कदम से केयर्न एनर्जी और वोडाफोन को फायदा होने की उम्मीद है. विवादित टैक्स कानून की वजह से दोनों कंपनियों के साथ भारत सरकार की कानूनी लड़ाई चल रही है. दोनों ही कंपनियां उन पर पहले की तारीख से लगाए गए टैक्स मामले में अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में जीत हासिल कर चुकी हैं.

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बता दे प्रस्तावित बिल में इनकम टैक्स एक्ट, 1961 में संशोधन की बात कही गई है ताकि भविष्य में रेट्रोस्पेक्टिव अमेंडमेंट के आधार पर 28 मई, 2012 से पहले हुए किसी भारतीय संपत्ति के ट्रांसफर पर किसी तरह का टैक्स नहीं लगाया जाएगा. 28 मई, 2012 को ही फाइनेंस बिल, 2012 को संसद की मंजूरी मिली थी. इसके बाद सरकार ने दोनों कंपनियों को टैक्स डिमांड भेज दी थी.

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