हिजाब और दाढ़ी

हिजाब की कहानी हिजाब की कहानी नहीं है, बल्कि इससे आगे की कहानी है। अभी हिजाब की बात चल रही है लेकिन कभी दाढ़ी को लेकर शक किया जाता है? कभी आपके पहनावे को लेके शक किया जाता है। ये केवल महिलाओं की ही बात नहीं है, पुरुषों की भी बात है। महिलाओं का आकलन हिजाब से किया जाता है तो वहीं पुरुषों को दाढ़ी और उनके पहनावे को लेकर शक के दायरे मे रखा जाता है। जन्म से मैं हिंदू  हूं मतलब कि जिस घर में मैंने जन्म लिया उससे तय हुआ कि मैं कौन हूं। जब तक मुझे बताया नहीं गया तब तक मुझे मालूम नहीं था कि मैं हिंदू हूं, मुस्लिम हूं, सिख हूं या किसी और धर्म का हूं। चूंकि मेरे पिता हिंदू थे इसलिए मैं बतौर हिंदू जाना जाने लगा। और मैं आज तक इसी गफलत में हूँ की कौन सा धर्म क्या है? हालांकि मैं हिंदू धर्म के बहुत सारे प्रैक्टिस को करता हूँ। देवी-देवता की कभी कबार पूजा करता हूँ अपने माँ-बाप के कहने पे। शायद इससे माँ-बाप को अच्छा लगे।

लेकिन अभी हिजाब को लेकर जो धार्मिक अनरेस्ट चल रहा है इस सबके बीच में कई ऐसे अनुभव होते हैं जिसमें आप के वस्त्रों से या पहनावे से आपको पहचाना जाता है कि आप किसी और मुल्क के रहने वाले हैं। मुझे काले रंग के कुर्ते पहनना अच्छा लगता है। तो एक दिन मैं फील्ड में अपना कार्य कर रहा तो कुछ लोगों ने बोला कि मुस्लिम हो क्या? मेरी दाड़ी काफी तेजी से बढ़ती है और घनी भी है लेकिन इसके विपरित मेरी मूंछ की ग्रोथ नहीं होती है। तो इसके कारण मेरी दाढ़ी अमूमन मूछों मुकाबले काफी बढ़ी होती है शायद जिससे लोगों को लगता है कि मैं मुस्लिम हूं। इस सबके कारण लोगों को मुझे अपनी पहचान साबित करनी पड़ती है और बताना पड़ता है कि मैं मुस्लिम नहीं हूं। ऐसा नहीं है कि केवल ये ऐसे समाज में होता है जहां पर लोगों को इसका इल्म नहीं है। बल्कि वहां भी करना पड़ता है जहां प्रबुद्ध लोग मौजूद हैं। कुछ समय पहले मुझे कुछ प्रबुद्ध लोगों ने मेरे कृष्णा नाम रखने पर सवाल उठाया और कहा कि आपका नाम यह कैसे हो हो सकता है? आपकी दाढ़ी तो कुछ और ही बयां कर रही है? इसके बाद उन्होंने मुझे सुझाव दिया कि आप अपनी दाढ़ी कटवा लो। आमतौर पर, मैं हिमाचली टोपी पहनता हूँ तो कुछ लोग जिन्हें इस टोपी के बारे में ज्ञान नहीं है उन्होंने समझा था कि मैं मुस्लिम हूं। उन्होंने बोला कि आप टोपी क्यों पहनते हो?

आज ऐसी ही समान घटना मेरे साथ पोस्ट ऑफिस में भी हुई जहां पर काम करने वाले कर्मचारी बहुत सारे एग्जाम पास करके आते हैं और साथ ही भिन्न-भिन्न संप्रदायों तथा स्थानों से हैं। ये लोग देश भर के लोगों के पत्र एवं अन्य सामान एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानांतरण करते हैं। इस प्रक्रिया में उन्हें अलग-अलग संस्कृति के लोगों के लिए काम करना होता है लेकिन ये लोग भी उन संस्कृतियों को समझ नहीं पाते हैं। आज की घटना भी कुछ इसी तरीके से हुई जब मैं एक पार्सल लेने पोस्ट ऑफिस गया धा।

जहां मैं रहता हूं वो एक मुस्लिम बहुल क्षेत्र है। पार्सल के ऊपर मेरा पता लिखा हुआ था, जिसमें मेरा नाम और मेरे मकान मालिक यानी रूम ओनर का नाम (सामान्य मुस्लिम व्यक्ति का नाम) लिखा हुआ था। मुझे देखकर पोस्ट ऑफिस के कर्मचारी ने का कि आपका नाम कृष्णा कैसे हो सकता है ये तो एक हिंदू नाम है और एक हिंदू नाम मुसलमान का कैसे हो सकता है। वह एक टक मेरे चेहरे की ओर देखने लगा और दाढ़ी को निहारने लगा। मुझे अपने आधार कार्ड जैसे पहचान के दस्तावेज दिखाने पड़े। उनका काम सिर्फ पार्सल देना था लेकिन उसने पार्सल देने से पहले हर तरीके से मेरी जांच की और कुटिल मुस्कान से हंस रहा था। मैंने जवाब देते हुए कहा कि आपने मेरी दाढ़ी से मान लिया कि मैं मुसलमान हूं। हांलाकि मैं किसी धर्म में विश्वास नहीं रखता हूं और सभी धर्मों का सम्मान करता हूं। ये कॉनफ्लिक्ट केवल हिजाब का नहीं है बल्कि यह समाज को तोड़ने की कॉनफ्लिक्ट है जो कभी हिजाब के नाम से तोड़ती है, तो कभी दाड़ी के नाम से तोड़ती है, तो कभी आपके पायजामे-कुर्ते के नाम से तोड़ती है।

“Krishna Mohan Poddar”

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