Emergency : Indira Gandhi का आपतकाल और चर्चित उपन्यास ‘कटरा बी आरज़ू’

शुभनीत कौशिक

नई दिल्ली: आपातकाल के बारे में गहराई से जानना हो, तो इतिहास और राजनीति की किताबों के साथ-साथ राही मासूम रज़ा का चर्चित उपन्यास ‘कटरा बी आरज़ू’ भी ज़रूर पढ़ना चाहिए। कारण कि जहाँ इतिहासकार अक्सर इंदिरा-संजय, जयप्रकाश नारायण और सम्पूर्ण क्रांति, कांग्रेस-जनसंघ तक सीमित होकर रह जाते हैं। वहीं राही मासूम रज़ा जैसा उपन्यासकार इलाहाबाद के कटरा मीर बुलाकी के जरिए मार्मिक अनुभवों की एक ऐसी खिड़की खोल देता है, जिससे आप देशराज और बिल्लो, पहलवान और बाबूराम जैसे आम लोगों के जीवन पर आपातकाल के प्रभाव को महसूस कर सकते हैं।

यह उपन्यास महात्मा गांधी के जमाने के बाबूराम जैसे उन निष्ठावान और ईमानदार कांग्रेसियों के बारे में भी है, जो इंदिरा युग तक आते-आते कांग्रेस में ही दरकिनार कर दिए गए। बाबूराम जैसे पुराने आदर्शवादी कांग्रेसियों की नियति रेणु बावनदास के रूप में ‘मैला आँचल’ में पहले ही दिखा चुके थे। बाबूराम की व्यथा को रज़ा इन शब्दों में बखूबी बयान करते हैं : ‘बाबूराम दिल-ही-दिल में और कांग्रेस के भीतर-भीतर बाबू गौरीशंकर पांडेय और उन जैसे पेशावर नेताओं के विरोधी थे और इसीलिए वह कांग्रेस में अपना कोई दल न बना सके और किसी दल ने भी उन्हें स्वीकार नहीं किया।’

एक ओर किनारे कर दिए गए बाबूराम तो दूसरी ओर गौरीशंकर पांडेय जैसे पाला बदलने वाले नेता, जो बक़ौल रज़ा ‘टिकटों की औलादें हैं। जहाँ टिकट बँटता है, वहाँ यह लोग पैदा हो जाते हैं।’

ये उपन्यास देशराज जैसे उन लोगों की कहानी है, जो ये जानते हैं कि ‘फ़ाके की एक अपनी भाषा होती है जो पेट-भरों के लिए ज़रा मुश्किल पड़ती है।’ वही हिम्मतवर और तनी हुई रीढ़ वाला देशराज जेल में अमानवीय अत्याचार झेलने के बाद अपाहिज हो घिसटकर चलते हुए बदस्तूर “स्रीमती गांधी की जय” के नारे लगाता है। और चुनाव में कांग्रेस छोड़कर जनता पार्टी में चले जाने वाले गौरीशंकर पांडेय की जीत के बाद निकली रैली में ट्रक के नीचे दबकर मर जाता है। अगले दिन अख़बार के किसी कोने में विजय के उल्लास से पटी खबरों के बीच दुर्घटना की एक मामूली खबर बन जाने के लिए।

आपातकाल की पृष्ठभूमि में देशराज और बिल्लो के टूटे हुए सपनों, पहलवान और बाबूराम की बिखरती हुई दुनिया, आशाराम और प्रेमा की अधूरी प्रेम कहानी की यह त्रासद कहानी राही मासूम रज़ा ही कह सकते थे। ज़रूर पढ़ें यह उपन्यास।

फेसबुक पेज से साभार ….

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