Karnal: मिनी सचिवालय के पास किसानों ने तोड़े बैरिकेड, टिकैत ने कही ये बात

Karnal Kisan Mahapanchayat: बड़ी संख्या में किसान महापंचायत करने के लिए मंगलवार को करनाल में एकत्र हुए, वहीं किसान नेताओं तथा अधिकारियों के बीच बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकलने के बाद प्रदर्शनकारियों द्वारा जिला मुख्यालय के संभावित घेराव के मद्देनजर स्थानीय प्रशासन एहतियाती तैयारियों में जुटा है. किसान संगठनों ने प्रदर्शनकारियों पर 28 अगस्त को करनाल में हुए पुलिस लाठीचार्ज को लेकर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है और ऐसा नहीं होने पर उन्होंने मिनी सचिवालय का घेराव करने की धमकी दी है.

किसानों के एकत्र होने के मद्देनजर जिला प्रशासन ने उनकी मांगों पर चर्चा करने तथा उन्हें सचिवालय की ओर मार्च से रोकने के लिए उनके 11 नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया था. हरियाणा भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढूनी ने बातचीत शुरू होने के तीन घंटे बाद संवाददाताओं से कहा, “प्रशासन हमारी मांगों से सहमत नहीं है.” चढूनी ने कहा कि बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला.

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  • यह पूछे जाने पर कि क्या किसान कुछ किलोमीटर दूर स्थित जिला मुख्यालय का घेराव करने की अपनी योजना की दिशा में आगे बढ़ेंगे, उन्होंने कहा, “अब, अगला कदम महापंचायत में तय किया जाएगा.”
  • भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) नेता राकेश टिकैत ने संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के उस अधिकारी को निलंबित करने की मांग की थी, जिन्होंने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों से प्रदर्शन कर रहे किसानों का ‘‘सिर फोड़ने’’ को कहा था.
  • स्वराज इंडिया प्रमुख योगेंद्र यादव ने ट्वीट करते हुए पहले कहा था कि हरियाणा पुलिस ने उनके और भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत सहित कई किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया है. इसके कुछ मिनट बाद उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि उन्हें छोड़ दिया गया है.

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  • प्रदर्शन की ऑनलाइन शेयर की जा रही तस्वीरों और वीडियो में किसान और अन्य प्रदर्शनकारियों की भीड़ झंडे और तख्तियां (और कुछ लाठियां लहराते हुए) दिखाते हुए दिख रहे हैं. उनसे कथित तौर पर कहा गया है कि वे पुलिस से कहीं भी ना भिड़ें, जहां भी उन्हें रोका जाए, विरोधस्वरूप वहीं बैठ जाएं.
  • योगेंद्र यादव ने किसानों से अनुशासित रहने और शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करने की अपील की है. उन्होंने किसानों से कहा, ‘इस सरकार की मंशा है कि (आपका) अनुशासन भंग किया जाए. आंदोलन को भंग कर दिया जाए. लेकिन हमें ऐसा नहीं होने देना चाहिए.’

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