महबूबा ने उठाया कश्मीरी पंडित और बिहारी व्यक्ति के मर्डर का मामला, दे डाला बड़ा बयान

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि हम गांधी के नहीं गोडसे के भारत में रह रहे हैं, जहां अपने विचार रखने के लिए लोगों पर आतंकवाद रोधी कानून थोपे जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने जम्मू कश्मीर को ‘शांतिपूर्ण’ दिखाया है जबकि असलियत यह है कि सड़कों पर खून बहाया जा रहा है। ‘नया कश्मीर’ के बारे में महबूबा ने कहा कि उनके दिवंगत पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद ने 2014 में भारतीय जनता पार्टी से इसलिए गठबंधन किया था क्योंकि वह राज्य में शांति का नया शासन लाना चाहते थे।

उन्होंने कहा, ‘मेरे पिता ने पहले अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता को देखा था और उन्हें उम्मीद थी कि भाजपा की नयी सरकार इसी विचारधारा पर काम करेगी।’ जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने ‘नया कश्मीर’ शब्द के इस्तेमाल पर सवाल उठाया और कहा, ‘जिस नए कश्मीर का प्रचार किया जा रहा है वह सच्चाई नहीं है। आज 18 महीने की लड़की सुरक्षा बलों के हाथों मारे गए अपने पिता का शव पाने के लिए प्रदर्शन कर रही है।’

उन्होंने पूछा, ‘आज, एक कश्मीरी पंडित की दिनदहाड़े हत्या कर दी गयी। सड़क पर एक बिहारी व्यक्ति का खून बहाया गया और हम इसे नया कश्मीर बुलाते हैं?’

‘नया कश्मीर भूल जाइए’

महबूबा ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘नया कश्मीर’ भूल जाइए और ‘नया हिंदुस्तान’ के बारे में बात करिए…नए हिंदुस्तान में , संविधान के बारे में बात करने वाले हर व्यक्ति को ‘टुकड़े टुकड़े गिरोह’ का तमगा दिया जाता है, अल्पसंख्यकों, चाहे वे सड़क किनारे का विक्रेता हो या कोई फिल्म स्टार, उसे सामाजिक और आर्थिक रूप से बहिष्कृत कर दिया जाता है, कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग कर रहे किसानों को खालिस्तानी कहा जाता है और उन पर यूएपीए के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है।’

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