OBC संशोधन : BJP को क्या मिल सकता है फायदा? क्या है यूपी चुनाव से कनेक्शन?

नई दिल्ली: केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने लोकसभा में OBC आरक्षण से जुड़े 127वां संविधान संशोधन बिल पेश किया, जिसे सदन ने 10 अगस्त, 2021 को 385 मतों से पारित कर दिया. विपक्षी कांग्रेस समेत सभी दलों ने इस बिल का समर्थन किया. अब यह बिल राज्यसभा से पारित होकर राष्ट्रपति के पास जाएगा.

127वां संविधान संशोधन बिल संविधान के अनुच्छेद 342A के खंड 1 और 2 में संशोधन करेगा और एक नया खंड 3 भी जोड़ेगा. इसके अलावा यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 366 (26c) और 338B (9) में भी संशोधन कर सकेगा. 127वें संशोधन विधेयक को यह स्पष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है कि राज्य और केंद्रसासित प्रदेश सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC) की “राज्य सूची” बनाने के लिए स्वतंत्र होंगे.

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क्या है ये संविधान संशोधन बिल? क्या बदलेगा?

अनुच्छेद 366 (26c) सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को परिभाषित करता है, जबकि अनुच्छेद 338B राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की संरचना, कर्तव्यों और उसकी शक्तियों से संबंधित है. आर्टिकल 342A राष्ट्रपति की शक्तियों, जिसके अनुसार राष्ट्रपति किसी विशेष जाति को SECB के रूप में नोटिफाई कर सकते हैं और ओबीसी लिस्ट में परिवर्तन करने की संसद की शक्तियों से संबंधित है.

यूपी चुनाव से क्या है कनेक्शन?

यूपी समेत पूरे उत्तर भारत में सियासत का पहिया जाति के आस-पास ही केंद्रित रहा है. राज्य में यादव समाजवादी पार्टी का वोट बैंक रहा है तो कुर्मी और कोइरी फिलहाल बीजेपी के पाले में है. 2017 के यूपी विधान सभा चुनाव में बीजेपी ने अति पिछड़े वर्ग और अति दलित जातियों के वोट की बदौलत ही राज्य में 14 वर्षों की सियासी वनवास खत्म किया था और सत्ता हासिल की थी. माना जा रहा है कि इस बिल के कानून बनने से उत्तर प्रदेश सरकार पिछड़ा वर्ग सामाजिक न्याय समिति की सिफारिशें लागू कर सकती हैं.

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योगी सरकार ने जस्टिस राघवेंद्र कुमार की अध्यक्षता में इस कमेटी का गठन किया था. इस समिति ने राज्य में ओबीसी आरक्षण को तीन वर्गों में बांटने की सिफारिश की थी. माना जाता है कि यूपी में ओबीसी आरक्षण का अधिकांश लाभ यादव, कुर्मी और जाट समुदाय के लोग उठा लेते हैं. यादव और जाट बीजेपी के वोटबैंक नहीं है.

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