PM Modi New Cabinet: रविशंकर प्रसाद का बोझ, और एक नकारा स्वास्थ्य मंत्री

नई दिल्ली: पीएम मोदी के मंत्रीमंडल (PM Modi New Cabinet) में फेरबदल क्या हुआ लगता है सभी की नींदें गायब हो गई है। दरअसल फिर से सत्ता पाने के लिए इस बार नया पैंतरा अपनाया गया है तभी तो 36 नए मंत्री बने हैं जिनमें से ज़्यादातर राज्य मंत्री बनाए गए हैं। कुछ पुराने राज्य मंत्रियों को बर्ख़ास्त कर दिया गया है। राज्य मंत्रियों की संख्या के कारण ही मोदी मंत्रिमंडल के सदस्यों की संख्या 54 से बढ़ कर 78 होती है। मोदी दौर में पहली बार मंत्रिमंडल का आकार इतना बड़ा बना है जो किसी मज़बूत प्रधानमंत्री का कम मजबूर प्रधानमंत्री का ज़्यादा लगता है।

अप्रैल और मई लाखों की मौत

मजबूरी इस अर्थ में कि मार्च, अप्रैल और मई के महीने में लाखों भारतीयों की मौत जिस तरह से हुई है उसके कई कारण सरकार की वजह से भी हैं। इसके कारण दुनिया भर में भारत की छवि अच्छी नहीं रही। प्रधानमंत्री मोदी के बारे में हर बड़े अख़बार में लिखा गया कि ये झूठ बोलते हैं। जनता को मरने की हालत पर छोड़ चुनाव में व्यस्त रहते हैं। फ्रांस में रफाल की जांच और ब्राज़ील में कोवैक्सीन विवाद के कारण दुनिया भर में भारत की छवि को धक्का पहुंचा है और अब प्रधानमंत्री मोदी को एक उभरते हुए नए निरंकुशवादी नेता के रुप में देखा जा रहा है।

ये भी पढ़ें :- UP Panchayat Chunav: हिंसा, मारपीट और गोलीबारी, फिर महिला की साड़ी खींची

मंत्रियों के अनाप-शनाप बयान

राज्य मंत्रियों को अभी तक चुनावी राज्यों के दौरों पर बूथ प्रबंधन के काम और अनाप-शनाप बयान देते हुए देखा गया था। किसी ने आज तक इस बात का मूल्यांकन नहीं किया कि मोदी दौर में राज्य मंत्री मंत्रालय में कितने दिन रहते हैं और चुनाव क्षेत्र में प्रबंधन हेतु मंत्रालय के बाहर कितने दिन रहते हैं। आप आज बर्ख़ास्त किए गए राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो के ट्वीट से देख सकते हैं।

हालांकि उन्होंने प्रधानमंत्री को मौका देने के लिए धन्यवाद तो दिया है लेकिन उन्होंने यह भी लिखा है कि बंगाल चुनाव में अपने इलाके में पार्टी के गढ़ को संभाले रहे। यह भी ताना मार दिया है कि इतने दिन मंत्री रहा और मुझे गर्व है कि भ्रष्टाचार के किसी दाग़ के बग़ैर बाहर आए हैं। खैर कहने का मतलब है कि बाबुल सुप्रियो का ट्वीट बता रहा है कि राज्य मंत्री किस लिए बनाए जाते हैं।

पिछले कई दिनों से बिना किसी पुख़्ता सूचना के मंत्रिमंडल के विस्तार की कथा को मीडिया में चलाया जा रहा था। ख़बर खड़ी करने के लिए चंद नाम बताए जा रहे थे लेकिन जब विस्तार की सूचना आई तो थोक के भाव में लोग मंत्री बनाए गए।

ये भी पढ़ें :-Special: Dilip Kumar और नेहरू के अनसुने दिलचस्प किस्से

रविशंकर प्रसाद का बोझ

किसी ख़बर में इसका संकेत तक नहीं था कि रविशंकर प्रसाद हटाए जा रहे हैं। एक कबीना मंत्री जो पिछले कई दिनों से ट्विटर जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनी में एक मैनेजर रखवाने के लिए संघर्ष कर रहा था, हर दिन ट्वीटर को धमका रहा था, उस कबीना मंत्री का बर्ख़ास्त किया जाना अच्छा नहीं है। ये रविशंकर प्रसाद ही बता सकते हैं और वे ED के दौर में दूसरे दल में जाने की हिम्मत भी नहीं करेंगे।

एक नकारा स्वास्थ्य मंत्री

उसी तरह डॉ हर्षवर्धन का हटाया जाना उन सवालों की पुष्टि करता है कि वे एक नकारा स्वास्थ्य मंत्री थे और सरकार ने कोरोना से लड़ने की कोई तैयारी नहीं की थी। तैयारी की होती तो न लाखों लोग मरते और न ही स्वास्थ्य मंत्री को हटाना पड़ता। ये अलग बात है कि मई महीने में मैंने स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखा था कि इस्तीफा दे दें।

देश की अर्थव्यवस्था चौपट हो चुकी है। यह भी प्रधानमंत्री जानते हैं। वित्त मंत्री बदल नहीं सकते क्योंकि बाज़ार को ग़लत संकेत जाएगा। आपको जानकर हैरानी होगी कि इसी 12 जून को कई अखबारों में ख़बर छपी कि वित्त मंत्रालय ने सरकार के मंत्रालयों से कहा है कि अपने ख़र्चे में 20 प्रतिशत तक की कटौती करें। जो सरकार एक महीना पहले मंत्रालयों के ख़र्चे कम करने को कह रही हो वही सरकार झोला भर-भर कर राज्य मंत्री बनाने लग जाए तो मैसेज समझ नहीं आता है।

ये भी पढ़ें :-Pabiben Rabari की प्रेरणादायक कहानी, 200 महिलाओं को दिया रोजगार

मंत्रियों की संख्या 54 से 78 करने का तुक समझ नहीं आता है। आने वाले पांच राज्यों में कितने राज्य मंत्रियों की ड्यूटी लगेगी। फिलहाल यह विस्तार प्रधानमंत्री राज्यमंत्री विस्तार योजना से कुछ नहीं है। मंत्रियों के आने और जाने से सरकार का काम नहीं बदलता है। नेतृत्व अपनी नाकामी से बचने के लिए यह सब करता रहता है। बाकी आप जानें और आपकी नियति जाने।

Leave a Reply