‘पुलिस अफसरों-सत्‍ताधारी दलों का गठजोड़ परेशान करने वाला’ : Supreme Court

नई दिल्ली: पुलिस अफसरों के सत्ताधारी दलों के साथ गठजोड़ पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने चिंता जताई है. प्रधान न्‍यायाधीश (CJI) एनवी रमना ने कहा कि देश में ये परेशानी करने वाला ट्रेंड है. पुलिस अफसर सत्ता में मौजूद राजनीतिक पार्टी का फेवर लेते हैं और उनके विरोधियों के खिलाफ कार्यवाही करते हैं. बाद में विरोधी सत्ता में आते हैं तो पुलिस अफसरों पर कार्यवाही करते हैं . इस हालात के लिए पुलिस विभाग को ही जिम्मेदार ठहराना चाहिए, उनको कानून के शासन पर टिके रहना चाहिए. इसे रोकने की जरूरत है.

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के निलंबित अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (Suspended Chhattisgarh IPS Officer) गुरजिंदर पाल सिंह (GP Singh) की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्‍पणी की. फिलहाल गुरजिंदर पाल को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि पुलिस उन्हें चार हफ्ते तक राजद्रोह और आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तार नहीं करेगी. इस संबंध में राज्य सरकार को नोटिस भी जारी किया गया है और अफसर को जांच में सहयोग करने को कहा गया है.

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क्या है मामला ?

राज्य सरकार ने 5 जुलाई को गुरजिंदर पाल सिंह को निलंबित कर दिया था. तब से एडीजी रैंक के वरिष्ठ आईपीएस भूमिगत हैं. अपनी गिरफ्तारी का अंदेशा जताते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उनकी तरफ से वरिष्ठ वकील फली नरीमन ने पूरी कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताया. चीफ जस्टिस एन वी रमना की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने राज्य सरकार की तरफ से पूर्व एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी पेश हुए. उन्होंने बताया कि सभी मुकदमे ठोस प्राथमिक सबूतों के आधार पर दर्ज किए गए हैं.

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गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक

आखिरकार, कोर्ट ने निलंबित आईपीएस की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी. कोर्ट ने उनसे जांच में सहयोग करने के लिए कहा है. इस दौरान चीफ जस्टिस ने अहम टिप्पणी की. उन्होंने कहा, “यह देखा जा रहा है कि कुछ पुलिस अधिकारी सत्ताधारी दल के लिए काम करते हैं. उन्हें खुश करने के लिए शक्ति का दुरुपयोग करते हैं. विपक्षी नेताओं को परेशान करते हैं. फिर जब सत्ता परिवर्तन होता है, तो नई सरकार ऐसे अधिकारी को निशाने पर लेती है.”

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