विकल्प व सम्भावनाओं की तलाश करने वाला राजनेता : किशन पटनायक

नई दिल्ली: आज की राजनीति मानों पैसों और गद्दी के लिए ही रह गई है, लेकिन एक समय में एक ऐसे राजनेता हमारे बीच रहे हैं जिन्होंने राजनीति की परिभाषा को बदल कर रख दिया था.आज भारत में समाजवादी आंदोलन की एक प्रखर आवाज़ रहे विचारक व राजनेता किशन पटनायक (Kishan Patnaik) (1930-2004) का जन्मदिन है.

किशन जी की किताब ‘विकल्पहीन नहीं है दुनिया’ में संकलित लेख उनकी राजनीतिक प्रतिबद्धताओं और सामाजिक सरोकारों की बानगी देते हैं। अगर आपने यह लेख नहीं पढ़ा है तो इस लेख पर जरा गौर कीजिएगा, इसमें आपको गांधी और लोहिया की गहरी छाप भी स्पष्ट दिखाई देगी.

ये भी पढ़ें:- Hool Diwas: एक पूरे परिवार की आज़ादी में दी गयी बलिदानी की कहानी

राजनीतिक-वैचारिक मुहिम

एक समय ऐसा भी था जब डॉक्टर लोहिया ने भी कभी समाजवादी युवाओं को सम्बोधित करते हुए उन्हें ‘निराशा के कर्तव्य’ बताए थे, लेकिन उन्होंने उन्हीं कर्तव्यों को किशन पटनायक ने विकल्पों और सम्भावनाओं की तलाश के साथ ‘सामयिक वार्ता’ जैसी पत्रिकाओं में राजनीतिक-वैचारिक मुहिम को बदल दिया था, किशन जी के ये लेख पढ़ते हुए आपको आश्चर्य होगा कि अभी डेढ़ दो दशक पहले तक भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में ऐसे राजनेता सक्रिय रहे हैं, जिन्होंने समकालीन राजनीति के साथ-साथ उपनिवेशिवादी मानसिकता, अर्थनीति, किसान आंदोलन, कूटनीति, प्रतिरक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, जाति प्रथा और सामाजिक-आर्थिक विषमता जैसे तमाम सवालों पर इतनी सुलझी हुई और स्पष्ट राय रखी.

ये भी पढ़ें :- विचार : Maitreyi Pushpa का सुधीश पचौरी पर कटाक्ष

भारतीय बुद्धिजीवियों की सीमाओं को भी किशन पटनायक ने अपनी कलम के दम पर बखूबी चिह्नित किया है, वे ठीक ही लिखते हैं कि ‘भारत का लगभग हरेक बुद्धिजीवी अपने जीवन में कई बार विभिन्न प्रसंगों में यह कहता हुआ पाया जाता है – ‘बात तो सही है, लेकिन इस पर अमल कठिन है।’ ‘लेकिन’ और ‘कठिन’ शब्दों का उच्चारण वह इस तरह करता है मानो कठिन और असम्भव का पर्यायवाची हो।’

अगर आप आज की राजनीति को समझना चाहते हैं तो किशन जी के लेखों का यह महत्त्वपूर्ण संकलन राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है जिसे ज़रूर पढ़ा जाना चाहिए।

Leave a Reply