समाज: ‘गांधीजी की पाठशाला’ ने पूरे किए एक साल

लेखक: चिराग झा

नई दिल्ली: भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आदर्शों पर शुरू हुए ‘गांधीजी की पाठशाला’ ने अपने एक साल पूरे कर लिए हैं। साल 2020 में अगस्त के महीने पत्रकारिता के आचार्य डॉ० सुभाष गौतम ने अपने छात्रों के एक समूह के साथ इस पाठशाला की शुरुआत की थी। कोरोना काल को देखते हुए इस पाठशाला का आयोजन ऑनलाइन वेबिनार के तौर पर कराया जा रहा था।

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29 अगस्त 2021 को पाठशाला के एक वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय और कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० बलदेव भाई शर्मा आमंत्रित थे। कार्यक्रम की शुरुआत पाठशाला के संरक्षक डॉ० सुभाष गौतम ने की और उन्होंने पाठशाला शुरू करने के अपने मकसद को बताया। डॉ० गौतम ने बताया की कैसे ‘क्लासरूम-कंज्यूमर’ के इस दौर में गुरु शिष्य प्रथा को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने इस पाठशाला की शुरुआत की।

उन्होंने यह भी बताया की पाठशाला आमंत्रित अतिथि को एक शिक्षक का दर्जा दिया जाता है और वह पाठशाला में उपस्थित छात्र छात्राओं के साथ गंभीर और समाज सुधारक विषयों पर चर्चा करते हैं। इसके बाद पाठशाला के मुख्य आयोजक आतिश आलोक ने पिछले एक साल का ब्योरा देते हुए बताया की कैसे साहित्य, कला, पत्रकारिता, सिविल सेवा और फिल्म इंडस्ट्री जैसे क्षेत्रों के जाने माने लोग पाठशाला में शिक्षक बन कर आए और छात्रों के साथ सकारात्मक चर्चा की।

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कार्यक्रम के मुख्य अथिति पद्मश्री राम बहादुर राय ने अपने वक्तव्य के शुरुआत में पाठशाला की सराहना करते हुए कहा की कि वह आगे भी इस पाठशाला को चलते रहना देखना चाहते हैं। इसके बाद उन्होंने भारतीय संविधान में महात्मा गांधी की भूमिका जैसे गंभीर विषय पर प्रकाश डाला और उपस्थित छात्रों के साथ इतिहास से जुड़े काफी रोचक तथ्य साझा किए। फिर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो० बलदेव भाई शर्मा ने अपना वक्तव्य दिया और भारतीय संविधान के विषय को आगे बढ़ाते हुए अपनी राय रखी। प्रो० शर्मा ने पाठशाला को भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दी।

कार्यक्रम के दौरान देश भर के तमाम महाविद्यालय और विश्वविद्यालय के छात्र और छात्राओं ने अतिथियों से अपने सवाल भी पूछे। पाठशाला के अतिथि-सह-शिक्षकों का परिचय और धन्यवाद क्रमशः मरियम आलम और बिरुपाक्ष कौण्डिल्य ने किया।

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