महाराष्ट्र के राज्यपाल के कर कमलों द्वारा हुआ “मानुष जन्म अमोल” पुस्तक का विमोचन

दिल्ली के महाराष्ट्र सदन मे 12 नवंबर को ” मानुष जन्म अमोल” , नाम की पुस्तक का विमोचन किया गया, आलोक पर्व प्रकाशन द्वारा प्रकाशित ये पुस्तक, जिसके रचयिता हैं राम सुन्दर शर्मा जी।

यह पुस्तक बलदेव भाई शर्मा, जो कुशाभाउ ठाकरे विश्विद्यालय के तत्कालीन कुलपति है, तथा पत्रकारिता जीवन मे 40 वर्ष से अधिक का अनुभव रखते हैं, उनके पत्रकारिता जीवन के मुल्य तथा विचारो को संजोती हैं।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित थे महाराष्ट्र के राज्यपाल महामहिम भगत सिंह कोश्यारी , मंच की अध्यक्षता कर रहीं थीं छत्तीसगढ़ की राज्यपाल महामहिम अनुसुया उईके, अतिथि थे संत पवन सिन्हा तथा प्रोफेसर संजय द्विवेदी जो भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली के तत्कालीन महानिदेशक हैं।

कार्यक्रम की शुरूआत पं विष्णु दत्त शर्मा जी ने अपने मुख से मंगलाचरण के वंदन से की । तत्पश्चात राम गोपाल शर्मा तथा बलदेव भाई शर्मा जी ने  गुलदस्ते तथा शॉल देकर अतिथियों का स्वागत किया।

कार्यक्रम के पहले वक़्ता बलदेव भाई शर्मा ने किताब से जुड़े सभी लोगों का अभिवादन किया तथा देश के विभिन्न राज्यों से आए लोगों को धन्यवाद ज्ञापित किया । उन्होंने कहा कि पत्रकार को बोलना कम चाहिए, जबकि उनका ध्यान देखने और सुनने पर ज्यादा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता ने उन्हें जीवन का असली मतलब सिखाया, मनुष्यता का अर्थ समझाया, संघ से सीखी सभी बातों को  पत्रकारिता मे उतारा जिससे मुझे इस क्षेत्र मे काम करने मे आसानी हुई । पत्रकार का काम इस समाज मे सबसे महत्त्वपूर्ण है, यह काम आपको अपने समाज के प्रति, देश के प्रति जिम्मेदारीयो से अवगत कराता हैं, इसका पहला और अंतिम काम हैं समाज मे खडे  अंतिम पग के लोगों को पहली कतार मे लाना। उन्होंने अपने वक्तव्य का अंत रहिमन के दोहे से किया, उन्होंने कहा हमे अपने आप को राम जैसा चरित्रवान बनाना चाहिए, लेकिन दुनिया टेढ़े लोगों को पसंद करता हैं, लेकिन मैंने अपने जीवन मे राम को चुना, दुनिया को नहीं।

 अगले वक्ता  प्रोफेसर संजय द्विवेदी ने बलदेव भाई शर्मा के जीवन से सीखी सभी बातों का जिक्र किया, तथा बताया कि संघर्ष के बीच अपनी विचारधारा पर अडिग रहकर, जब राष्टवाद अपनी चरम सीमा पर थी, उस समय मे भी बलदेव भाई शर्मा जी ने अपने मुल्य को नहीं छोङा तथा राष्ट्र हित पर लिखते रहे।

पवन सिन्हा ने इस किताब को दर्शन कहा, उन्होंने कहा कि इसमे किताब मे संघर्ष है, अनुभव हैं, उन्होंने युवा पीढ़ी को खास तौर पर इस किताब को पढ़ने का सलाह दिया। उन्होंने बलदेव का जिक्र करते हुए कहा कि ये एक उर्जावान पुरुष है जिन्होंने अपने पद को अपने कर्मों की सच्चाई, और निष्ठा से सुशोभित किया है, ये पद से नहीं जाने जाते, ब्लकि पद इनसे जानी जाती है।

महामहिम राज्यपाल अनुसूइया ने कहा कि, वैसे तो बलदेव बहुत पुरुस्कारों से सम्मानित है, लेकिन इनका नाम खुद एक पुरूस्कार है, उन्होंने उनके इस देश, पत्रकारिता तथा विश्विद्यालय के लिए निस्स्वार्थ भाव से किए गए काम के लिए  धन्यावाद ज्ञापित किया।

सभा के अंतिम वक्ता थे, महाराष्ट्र के महामहिम राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी जी, उन्होंने कहा कि राजनेताओं, मंत्रियों, देश के प्रसिद्ध लोगों के बारे मे सब लिखते हैं, लेकिन साधक के बारे मे कोई नहीं लिखता, पत्रकारिता को उन्होंने दो धारी तलवार कहा, क्यूंकि यहा कमिशन से ज्यादा मिशन की जरूरत होनी चाहिए, उन्होंने कहा  वेदव्यास जी कहते है लेखनी तब सफल होती है जब वो साधक के बारे मे लिखा जाए, और बलदेव भाई शर्मा ने हमेशा साधको पर ही लिखा है, इसलिए इनकी पत्रकारिता ज्यादा महत्त्वपूर्ण है। तत्पश्चात कार्यक्रम का अंत राष्ट्र – गाण से मंगल वाचन से किया गया।

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