आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के आरक्षण के लिए बने मानदंडों की होगी समीक्षा, सरकार ने किया तीन सदस्यीय समिति का गठन

भारत सरकार (Indian Government) ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (Economically Weaker Sections EWS) के आरक्षण के मानदंडों की समीक्षा के लिए 3 सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता पूर्व वित्त सचिव अजय भूषण पांडे (Ajay Bhushan Pandey) करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, इस कमेटी को तीन हफ्ते के अंदर काम पूरा करने का निर्देश दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक, इस समिति को सुप्रीम कोर्ट की 21 अक्टूबर 2021 की टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए ईडब्ल्यूएस श्रेणी के निर्धारण के मानदंडों की समीक्षा करनी होगी। समिति को आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की पहचान के लिए देश में अब तक अपनाए गए विभिन्न दृष्टिकोणों की भी जांच करनी होगी। इसके अलावा, भविष्य में इस श्रेणी की पहचान के लिए मानदंड की सिफारिश भी करनी होगी। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा जरूरत के मुताबिक तीन सदस्यीय समिति को सचिवीय सहायता प्रदान की जाएगी।

नीट में आरक्षण के लिए प्रमुख मानदंड की समीक्षा

वहीं, इससे पहले ऑल इंडिया कोटा में ईडब्ल्यूएस आरक्षण को लागू करने के अपने फैसले को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि मेडिकल स्टडीज में रिजर्वेशन के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को निर्धारित करने के मानदंडों पर पुनर्विचार किया जाएगा। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए वर्तमान आय सीमा 8 लाख रुपये प्रति वर्ष से कम है और केंद्र ने इस मुद्दे पर पुनर्विचार करने के लिए चार हफ्ते का समय मांगा था। केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि तब तक नीट के लिए कोई काउंसलिंग नहीं होगी।

कोर्ट ने केंद्र को एक महीने का समय दिया है और इस मामले की अगली सुनवाई छह जनवरी को होगी। मामले की समीक्षा करने का फैसला तब आया जब अदालत ने हाल ही में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 8 लाख रुपये का वार्षिक तय करने के आधार पर केंद्र से सवाल किया था। 21 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सवाल उठाए थे और एक बिंदु पर न्यायाधीशों ने यहां तक ​​​​चेतावनी दी थी कि वे ईडब्ल्यूएस अधिसूचना को रोक देंगे।

न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सरकार से सवाल किया था कि क्या 8 लाख रुपये की सीमा का कोई आधार है। अदालत ने पूछा था कि क्या कोई सामाजिक, क्षेत्रीय या कोई अन्य सर्वेक्षण या डेटा है जो यह दर्शाता है कि अन्य पिछड़ा वर्ग जो प्रति वर्ष 8 लाख रुपये से कम आय वर्ग में हैं, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हैं।

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