1948 का पहला ओलंपिक, जब भारतीय हॉकी टीम का 20,000 लोगों ने किया अभिवादन

नई दिल्ली: वर्ष 1948 था और ओलंपिक लंदन में आयोजित किया जा रहा था। द्वितीय विश्व युद्ध और विभाजन के बाद, भारतीय हॉकी फेडरेशन बहुत मुश्किल से, इन खेलों के लिए एक टीम को मैदान में रखने में कामयाब रहा था। ध्यान चंद सेवानिवृत्त हो गए थे, लेकिन भारतीय टीम में प्रतिभा की कोई कमी नहीं थी। यह टीम ओलंपिक में पहली बार, अपने ध्वज तले चल रही थी।

जब टीम, वेम्बली स्टेडियम में उत्तरी, तो लगभग 20,000 लोगों की भीड़ ने खड़े होकर उनका अभिवादन किया, जो उनका खेल देखने के लिए उत्सुक थे। टीम भी अपने नए स्वतंत्र देश का सर गर्व से ऊंचा करने के लिए अडिग थी। प्राथमिक मुकाबलों में भारतीय टीम के बलबीर सिंह ने प्रतिभाशाली भूमिका निभाई। टीम ने फाइनल में पहुंचने के लिए सेमीफाइनल में नीदरलैंड को हराया।

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बिलकुल किसी फिल्म के क्लाइमेक्स की तरह ही, फाइनल में आखिरकार भारत के प्रतिद्वंदी के रूप में, ग्रेट ब्रिटेन था। सेमीफइनल में ग्रेट ब्रिटेन ने पाकिस्तान को हराया था, जिनका खेलने का तरीका बिलकुल भारत जैसा था। अंग्रेज़ों को लगा कि फाइनल में भी वे ही जीतेंगें। हालाँकि, उनके लिए फाइनल का मुकाबला किसी सदमे से कम न था।

खेल वाले दिन हल्की बारिश के कारण मैदान भारी और मिट्टीनुमा हो गया था। ये सभी परिस्थितियां, घरेलू टीम (ब्रिटेन) के पक्ष में थीं। पर फ़िर भी शानदार खिलाड़ी लेस्ली क्लॉडियस के नेतृत्व में खेल रहे ग्रेट ब्रिटेन को, भारतीय टीम ने 4-0 से हरा दिया और आखिर ध्यानचंद का वर्षों का सपना पूरा हुआ !

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अंग्रेज़ों से आज़ादी के एक साल बाद ही, उन्हीं की मिट्टी पर भारतीय तिरंगा लहराया और राष्ट्र गान गाया गया। उन खिलाड़ियों के लिए वह एक कभी न भूलने वाला पल था और हर भारतवासी के लिए भी।

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