अगस्त क्रांति का ख्याल गांधी जी के मस्तिष्क से निकला था और इसका नारा था करेंगे या मरेंगे

2 अक्टूबर, 2021, नई दिल्ली

अगस्त क्रांति गांधी जी के मस्तिष्क की उपज थी। उसका प्रस्ताव उन्होंने खुद ड्राफ्ट किया था। यह प्रस्ताव सेवाग्राम आश्रम से लेकर मीरा बहन, स्वराज भवन जिसे आनंद भवन के नाम से भी जानते हैं, गई थीं। कांग्रेस कार्य समिति की वहां बैठक हुई। इस प्रस्ताव का एक एक शब्द गांधी जी का लिखा हुआ था। इस प्रस्ताव पर पर्याप्त गहमागहमी हुई, तब जाकर यह पास हुआ। इस प्रस्ताव में ही अंग्रेजों भारत छोड़ो और करेंगे या मरेंगे कहा गया था। अब जब भी अगस्त क्रांति की चर्चा होती है करो या मरो शब्द प्रयुक्त किया जाता है, यह सही नहीं है। गांधी जी ने कहा था करेंगे या मरेंगे। उनके हस्तलिखित में यही मिलता है।

उक्त बातें पद्मश्री राम बहादुर राय ने महात्मा गांधी की 152 वीं जयंती के अवसर पर राजधानी कॉलेज में गांधी स्वाध्याय मंडल और दधीचि : द कॉम्पेटिटीव सोसायटी द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम ” गांधी@2k21: मजबूती का नाम महात्मा गांधी ” के समापन सत्र में ” महात्मा गांधी और अगस्त क्रांति ” विषय पर बोलते हुए कही। श्री राय ने कहा कि इस आंदोलन में गांधी जी ने कहा था कि जब नेता गिरफ्तार हो जायेंगे तो जनता खुद को नेता समझे और आंदोलन को गति प्रदान करे।

गांधी जी की गिरफ्तारी के बाद उन्हें जिस आगा खां महल में रखा गया उसे महल कहने पर उस दौर में गांधी जी की सजा की यातना समझ नहीं आती। जबकि इसमें जेल जैसा कठोर विधान अंग्रेजों ने बना रखा था। महल के छोटे हिस्से को घेरकर उसमें गांधी जी को रखा गया था। उन्होंने आगे कहा कि इस जेल के दौरान गांधी जी ने अपने पुत्रवत महादेव देसाई और अपनी पत्नी को भी खोया। दोनों की मौत इसी जेल में हुई। यह उनके निजी जीवन पर गहरा धक्का था। पर गीता को माता मानने वाले गांधी समत्व भाव में रहकर अगस्त क्रांति से खुद को जोड़े रखे।

राजधानी कॉलेज के इस कार्यक्रम में अखिल भारतीय स्तर पर चार प्रतियोगिताएं आयोजित की गई थीं। कविता प्रतियोगिता “महात्मा गांधी : मनुष्यता के लिए एक प्रार्थना”, वाद- विवाद प्रतियोगिता ‘अफगानिस्तान मुद्दे समेत अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विषयों पर आम भारतीय की समझ अमूमन तथ्यपरक नहीं होती है’, निबन्ध लेखन प्रतियोगिता “गांधी रास्ता भी चुनौती भी” और पत्र लेखन प्रतियोगिता “गांधी जी को एक पत्र ” विषय पर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों स्तर पर आयोजित थीं।

छात्र छात्राओं के लिए आयोजित इन प्रतियोगिताओ के साथ इस दो दिवसीय आयोजन में विचार विमर्श के सत्र भी थे जिसमें कई जाने माने लेखक, पत्रकार और विद्वानों ने शिरकत की । उद्घाटन सत्र में “मजबूती का नाम महात्मा गांधी ” विषय पर डीयू के डीन ऑफ कॉलेजेज प्रोफेसर बलराम पाणी , गांधी विचार के विद्वान डॉक्टर जितेंद्र कुमार बजाज और प्रो. प्रतिभा एम.लूथरा ने विचार विमर्श किया। प्रो पाणी ने आज के दौर में गांधी जी से मिलने वाली व्यावहारिक सीख की चर्चा की तो डॉक्टर बजाज ने स्वराज का अभिप्राय और उसके स्रोत की व्याख्या की। डॉक्टर बजाज ने ” हिंद स्वराज ” और ” दक्षिण अफ़्रीका के सत्याग्रह का इतिहास ” को अनिवार्य पाठ्य पुस्तक बनाए जाने की सिफारिश करते हुए कहा कि मौजूदा दौर के संकट और गांधी के निर्माण और उनकी आत्म चेतना को समझने के लिए ये दोनों पुस्तकें अनिवार्य हैं।

दूसरे दिन पत्रकार सोपान जोशी और अजय सहाय ने ” गांधी युवाओं के लिए ” विषय पर विमर्श किया। श्री जोशी ने व्याख्यान के स्थान पर छात्र – छात्राओं से सीधे बातचीत की और उनके भय, अशांति, असफलता और सफलता के द्वंद तथा परिवार द्वारा पढ़ाई व रोजगार के दबाव से जुड़े निजी सवालों का जवाब गांधी दर्शन के हिसाब से दिया। उन्होंने कहा कि हमारी आज की चुनौतियों को समझने और उसका हल निकालने में गांधी जी एक अभिभावक की तरह दिखते हैं। वे पूरी संवेदना से निजी दिक्कतों को सुनते और समझाने वाले व्यक्ति हैं। इस सत्र में विद्यार्थियों ने बखूबी महसूस किया कि गांधी जी अभी हैं, हमारे ही भीतर; संवाद और भीतर चलने वाले मंथन एवं द्वंद्वों में। अजय सहाय ने गांधी जी के 11 व्रतों के बारे में बताया और सभी की समानता की धारणा की व्याख्या की ।

इस दो दिवसीय कार्यक्रम में गांधी जी और शेख की दोस्ती पर हेमन्त की कहानी पर आधारित नाटक ‘दोस्त मोहनदास’ का सफल मंचन त्र्यम्बक समूह द्वारा किया गया । नाटक में युवा गांधी के जरिए बताया गया कि जिसे सुधारना हो उसके साथ एक रचनात्मक दूरी कायम रखनी चाहिए। नाटक के अलावा ” रूबायत” ने गांधी जी के प्रिय भजनों की प्रस्तुति की। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में खादी एवं ग्रामोद्योग की प्रदर्शनी भी भी आयोजित थी। कार्यक्रम के अंत में कॉलेज के प्राचार्य प्रो राजेश गिरि, संयोजक डॉ राजीव रंजन गिरि, प्रो आरडी शर्मा, प्रो वर्षा गुप्ता, डॉ हरीश कुमार ने पुरस्कार वितरण किया। प्राचार्य प्रो राजेश गिरि ने कहा कि हमारा कार्यक्रम गांधी जी के स्वप्नों और संघर्षों को नई पीढ़ी तक ले जाने के प्रयास का प्रतिफल है।

इस अवसर पर आजादी के अमृतमहोत्सव के तहत दो दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया जिसका मुख्य विषय “गाँधी और उनका जीवन” था। इस प्रदर्शनी के मुख्य अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय से डीन ऑफ़ कॉलेज प्रोफेसर बलराम पाणी थे। प्रो पाणी ने कहा कि विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन हेतु इस तरह की पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन समय समय पर होता रहना चाहिए। पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ संजीव शर्मा ने बताया कि प्रदर्शनी में विशेष रूप से राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के जीवन से सम्बंधित साहित्य को प्रदर्शित किया गया है ताकि आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में विधार्थियों को राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी के विचारों से प्रेरणा मिल सके। प्रदर्शनी के समापन सत्र में कॉलेज के प्राचार्य प्रो राजेश गिरि ने बताया के ऐसे आयोजन से विद्यार्थियों को ज्ञानवर्धन के साथ साथ नैतिक शिक्षा भी मिलती है।

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