क्या करे कांग्रेस! वरिष्ठ और युवा पीढ़ी दोनों में गहराया है असंतोष

नई दिल्ली: कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक बड़ा कदम उठाते हुए जल्द लोकसभा में पार्टी का नेता बदल सकती है। अटकलें लगाईं जा रही हैं कि सोनिया गांधी अधीर रंजन चौधरी को पद से हटाकर किसी और को लोकसभा में पार्टी के नेता की बागडोर सौंप सकती हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस में जल्द होने वाले कई बदलावों में से एक यह भी होगा, जो संसद के मानसून सत्र से पहले सामने आया है। 

TMC से है तालमेल

अधीर रंजन चौधरी को लोकसभा में पार्टी के नेता पद से हटाने के फैसले को तृणमूल कांग्रेस के साथ तालमेल बनाने और भाजपा के खिलाफ अभियान का समन्वय करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। बता दें कि एक ओर जहां कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों में वामदल के साथ गठबंधन करके तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। वहीं दूसरी ओर केंद्रीय नेतृत्व ने मुख्य रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला करने से परहेज किया था और उनकी जीत का स्वागत किया था।

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गुटबाजी का शिकार है पंजाब कांग्रेस

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। पंजाब में कैप्टन अमरिंदर और नवजोत सिंह सिद्धू की लड़ाई जगजाहिर है। चुनाव से पहले यहां भी कांग्रेस के नेता दल बदल सकते हैं। कांग्रेस में नेतृ्त्व एवं उसके कामकाज को लेकर पार्टी नेताओं की आपत्तियां नई नहीं हैं। नेतृत्व में बदलाव और नया अध्यक्ष चुनने के लिए पार्टी के 23 नेता पत्र लिखे चुके हैं। इन 23 नेताओं में पुराने आर नए दोनों नेता शामिल हैं। नेताओं को लगता है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में आलाकमान पार्टी को सही दिशा नहीं दे पा रहा है। वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल समय-समय पर पार्टी के इस संकट की तरफ इशारा कर चुके हैं।

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युवाओं में भरोसा नहीं जगा पा रही कांग्रेस

कांग्रेस नेतृत्व अपने नेताओं में भरोसा नहीं जगा पा रही है। कोरोना संकट के समय लोग व्यवस्था से परेशान दिखे। विपक्षी दलों के लिए जनता के साथ खड़े होने और सरकार को घेरने का यह अच्छा मौका होता है, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व जिस तरह की टोकन और वर्चुअल वाली राजनीति कर रहा है इससे उसका भला नहीं होने वाला है। केवल ट्वीट करने से राजनीति नहीं चलती। महंगाई जैसा मुद्दा जो जनता से सीधा जुड़ा है, इस पर भी देश की सबसे पुरानी पार्टी सरकार को बैकफुट पर नहीं ला पाई है। कांग्रेस में भरोसे का जो संकट खड़ा हुआ है उसे यदि दूर नहीं किया गया तो आने वाले समय में पार्टी को और मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

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