राकेश टिकैत का ये बयान क्या फिर फुक देगा किसान आंदोलन में जान ?

नई दिल्ली : कोरोनावायरस की लहर थमते हुए देश में एक बार फिर से किसानों के आंदोलन की लहर को बढ़ावा देती नजर आ रही है. कृषि कानून के विरोध में आंदोलन कर रहे किसान एक बार फिर से विरोध की ज्वाला लेकर सरकार की ओर कदम बढ़ा चुके हैं, जिसका नेतृत्व कर रहे हैं किसानों के नेता राकेश टिकैत. जी हां राकेश टिकैत ने एक बार फिर से हुंकार भरते हुए सरकार से कहा है कि अगर जल्द ही कोई फैसला नहीं लिया तो इस बार का परिणाम आपकी सोच से भी बढ़कर होगा.

19 जून को किया था राकेश टिकैत ने ट्वीट

राकेश टिकैत ने 19 जून को एक ट्वीट किया था जिसमें लिखा था कि, ‘केन्द्र सरकार ये गलतफहमी अपने दिमाग से निकाल दे कि किसान वापस जाएंगे, किसान तभी वापस जाएंगे, जब मांगें पूरी हो जाएंगी। हमारी मांग है कि तीनों कानून रद्द हों। एमएसपी पर कानून बने।’

इस ट्वीट के बाद एक बार फिर राकेश टिकैत ने सरकार को चुनौती देते हुए निशाना साधा है. राकेश टिकैत ने ट्वीट करते हुए लिखा कि देश को लुटेरों से बचाने के लिए तीन चीजें जरूरी है । सरहद पर टैंक, खेत में ट्रैक्टर, युवाओं के हाथ में ट्विटर।राकेश टिकैत ने ट्वीट करते हुए कहा कि, ‘सरकार मानने वाली नहीं है। इलाज तो करना पड़ेगा। ट्रैक्टरों के साथ अपनी तैयारी रखो। जमीन बचाने के लिए आंदोलन तेज करना होगा।’’

बता दें कि यह कोई पहली बार नहीं है जब राकेश सरकार के सामने अपना प्रदर्शन करने वाले हैं . इससे पहले भी काफी बार किसानों का सरकार से आमना-सामना हो चुका है. काफी बार सरकार ने किसानों से बातचीत करने की कोशिश भी की मगर हर बार नतीजा शून्य निकला. यही वजह है कि इस बार किसान सरकार से बातचीत नहीं करना चाहते, वह सीधा विरोध करना चाहते हैं. क्योंकि किसानों का कहना है कि सरकार अब बातचीत से बात सुनने वाली नहीं है.

अब सरकार को दिखाना होगा कि अगर किसान खेती कर सकता है तो वह अपने हक के लिए बड़े से बड़ा आंदोलन की लड़ सकता है. अब देखना यह होगा कि किसानों का यह बड़ा आंदोलन सरकार को किस तरीके से डराता है और क्या सरकार एक बार फिर से किसानों से बात करेगी या फिर यह आंदोलन इसी तरह से चलता रहेगा.

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